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राहत कार्यों में जुटी मशीनरी, 22 के मरने की पुष्टि

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बचाव कार्यों में जुटी प्रशासनिक मशीनरी
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मुजफ्फरनगर। खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस रेल हादसे में जिला प्रशासन ने 22 यात्रियों के मरने की पुष्टि की है। मुजफ्फरनगर में 20 शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके अलावा दो शवों का पोस्टमार्टम मेरठ और गाजियाबाद में हुआ है। सभी मृतकों के डीएनए नमूने जांच के लिए रखे गए हैं। 98 घायलों की सूची भी जारी की गई है। हादसे के बाद से बचाव और राहत कार्य जारी है। उत्तर रेलवे के डीआरएम आरएन सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया। पिछले 24 घंटे से सहारनपुर-दिल्ली रेलमार्ग पूरी तरह बाधित है।
मुजफ्फरनगर के खतौली में शनिवार शाम 5.47 बजे पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस टूटे हुए ट्रैक से उतरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। तेज धमाके के साथ बोगियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गईं। दो डिब्बे एक मकान और इंटर कॉलेज में घुस गए। एसी थ्री टायर के दो कोच और पेंट्री कार समेत कुल 12 डब्बे पलट गए। अंधेरा होने के कारण बचाव और राहत कार्यों में दिक्कतें पेश आईं। देर रात तक एनडीआरएफ और रेलवे के बचाव दलों ने मोर्चा संभाल लिया। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने रेल हादसे में 22 यात्रियों के मरने की पुष्टि कर दी है। हालांकि अभी तक 17 शवों की पहचान हो पाई है। पांच यात्रियों के शवों की शनाख्त नहीं हो पाई।
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रविवार को मुजफ्फरनगर में 20 यात्रियों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। एक-एक यात्री की उपचार के दौरान मेरठ और गाजियाबाद में मौत हुई है, उनके शवों का पोस्टमार्टम वहीं पर कराया गया है। सभी मृतक यात्रियों के डीएनए नमूने जांच के लिए रखे गए हैं। भोपा रोड स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर मृतकों के परिजनों ने शव पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम नहीं होने पर हंगामा किया। एडीजी रेलवे विजय कुमार मौर्य ने बातचीत कर एसडीएम शीतल प्रसाद गुप्ता को तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से 98 घायलों की सूची जारी की गई है। घायलों का स्वामी कल्याणदेव राजकीय जिला चिकित्सालय, बेगराजपुर मेडिकल कालेज, मेरठ और गाजियाबाद के अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
हादसे के 24 घंटे बाद भी सहारनपुर दिल्ली मार्ग पूरी तरह बाधित है। गाजियाबाद और अंबाला से आई रेलवे की विशेषज्ञ टीमें और क्रेनें पटरी पर बिखरे डिब्बों को उठाने में जुटी रहीं। उखड़ी पटरी को बिछाने के लिए अलग से रेलकर्मियों का दल लगा हुआ है। उत्तर रेलवे के डीआरएम आरएन सिंह और जरनल मैनेजर आरके कुलश्रेष्ठ ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। दुर्घटना के सवालों पर अफसर कन्नी काटते नजर आए। उनका कहना है कि मामले की जांच के बाद ही सत्यता सामने आएगी। दुर्घटना की असली वजह क्या है, जब शुक्रवार की रात पटरी क्रैक हुई थी फिर एक्सप्रेस ट्रेनों को कॉशन क्यों नहीं दिया गया।
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मेरठ कैंट से नॉन स्टॉप दौड़ रही उत्कल एक्सप्रेस को कैसे पास कर दिया गया। तमाम सवालों को लेकर रेलवे अफसर कटघरे में हैं। दुर्घटना में रेलवे की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। बचाव कार्यों के दौरान ट्रैक पर जमा भीड़ को संभालने के लिए आरपीएफ, जीआरपी और पीएसी के जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। खतौली जीआरपी प्रभारी अजय कुमार ने जीआरपी मुजफ्फरनगर थाने में रेल हादसे का अज्ञात के खिलाफ धारा 337, 287, 338, 423, 304ए और 151-157 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। घटनास्थल पर कैंप किए एडीजी रेलवे वीके मौर्य ने मामले की जांच रेलवे सीओ गाजियाबाद रणधीर सिंह को सौंपी है। मुरादाबाद मंडल रेलवे एसपी केशव चौधरी, कमिश्नर दीपक अग्रवाल, डीएम जीएस प्रियदशी, एसएसपी अनंत देव और अन्य अधिकारी खतौली में रेस्क्यू होने तक जमे रहे। देर रात तक अफसरों ने सहारनपुर-दिल्ली रेलमार्ग को सुचारु करने का दावा किया है।
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