कांवड़ यात्रा से रोडवेज को एक करोड़ का फटका
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा से रोडवेज को एक करोड़ का फटका लगा है। सबसे अधिक नुकसान नेशनल हाईवे बंद होने के कारण हुआ है। मार्गों की दूरी बढ़ाकर बसों का संचालन किया गया, लेकिन औसत लोड फैक्टर लाने में भी चालक-परिचालकों के पसीने छूट गए। दूरी अधिक होने से किराया बढ़ा तो यात्रियों की संख्या सीमित हो गई, जबकि सहारनपुर और देहरादून मार्ग पर बसों ने थोड़ी कमाई की है।
कांवड़ में शिवभक्तों की सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने रूट डायवर्ट कर दिए। इसको रोडवेज निगम की इनकम पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। जनपद से भी मेरठ, दिल्ली के साथ देहरादून, सहारनपुर जाने वाली बसों के मार्ग पर परिवर्तन किया गया। हालांकि हाईवे पूरी तरह से बंद होने के कारण रोडवेज औसत कमाई निकालने में भी विफल रहा है। 13 जुलाई से हाईवे पर बसों का संचालन बंद कर उन्हें डायवर्ट मार्ग से निकाला गया। इसके चलते जनपद से मेरठ जाने वाली बसों को जानसठ, मीरापुर से वाया मवाना के रास्ते निकाला गया। जिसके चलते किराया बढ़ गया, जबकि मुख्य कस्बों से बसें हट गईं। अधिकांश रूट बंद होने से बसों के पहिये थम गए।
अनुबंधित बसों का संचालन तो बेहद कम रहा है। रोजाना की 20 लाख रुपये कमाई करने वाला रोडवेज 10 लाख तक सिमट गया। डिपो की बसों के रूट बंद होने से चालक-परिचालकों ने भी आना बंद कर दिया। बदले गए रूट से निगम को रोजाना 10 लाख रुपये का फटका लगा है। कुल मिलाकर अब एक करोड़ रुपये रोडवेज को फटका लगा है। हालांकि आधी इनकम देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और सहारनपुर रूट के साथ अन्य डायवर्ट रूटों पर बस को दौड़ाकर पूरी की गई है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि कांवड़ यात्रा में कम यात्रियों के निकलने से निगम को नुकसान सहना पड़ा है। हालांकि कुछ रूट पर यात्रियों की संख्या सही रही है। कांवड़ यात्रा से दूरी बढ़ गई तो किराए भी वृद्धि हुई है। ऐसे में बेहद जरुरी सफर करने वाले यात्रियों ने रोडवेज में सफर किया।