जनपद में खाद्य पदार्थों में मिलावट के कई केस मिले हैं। जनवरी में लिए गए हल्दी-मिर्च के पाउडर में हानिकारक रंग पाए गए हैं। इसके अलावा भी मिठाई भी अधोमानक पाई गई है। इस पर कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने मुकदमा पंजीकृत कराया है।
इसी साल जनवरी में खतौली में नूरहसन की चक्की से हल्दी-मिर्च, शहर में कृष्णापुरी से बतीसा मिठाई के साथ दूध-मावे के सैंपल लिए थे। लखनऊ से जांच रिपोर्ट में नमूने फेल निकले हैं। हल्दी-मिर्च में केमिकल युक्त हानिकारक रंग, बतीसा में पीला रंग भी अधोमानक पाया गया है।
नई मंडी में एक थोक व्यापारी के यहां टीम ने पान बहार और कुबेर विलास पान मसाला के नमूने लिए थे, जिसकी जांच में घातक मिलावट मिली है। पान मसाला में कत्थे के स्थान पर हानिकारक तत्व गैनबियर पाया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी राहुल कुशवाहा ने बताया कि शहर और देहात में सर्वाधिक घातक रंग की मिलावट बूंदी के लड्डुओं में मिली है।
लड्डू को चमकीला बनाने के लिए जो रंग प्रयोग किया जा रहा है, वह स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। नमूने फेल होने पर सभी के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट में मुकदमे पंजीकृत किए गए। खाद्य विभाग द्वारा भेजे गए करीब 300 नमूनों में से 250 की रिपोर्ट आई है। जिनमें 20 नमूने विभिन्न खाद्य पदार्थों के फेल निकले हैं। उधर, डीओ विनीत कुमार ने बताया कि मिलावटखोरों के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट से जुर्माना लगाया गया है। पुराने पेंडिंग चल रहे 51 मामलों में करीब साढ़े आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
दो साल बाद लगा जुर्माना
कोर्ट रोड के व्यापारी अजय कुमार गुप्ता, खतौली के चंद्रप्रकाश टोकनदास पर मैगी के नमूने फेल होने पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मैगी में एएस की मात्रा अधिक मिली है, जो खाने योग्य नहीं पाई गई है। जिसे इसे अधोमानक माना गया।