लालूखेड़ी के स्टेट बैंक के बाहर लगी भी़ड़।
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बैंकों में जमा पैसा समय पर नहीं मिलने आम जनता का शादी में शरीक होना भी मुश्किल हो गया है। शादी में रिश्तेदारी में भात और कन्यादान तक के पैसे आम आदमी को नहीं मिल पा रहे हैं। अपना ही पैसा बैंक से निकलने में आ रही दिक्कत से किसान-मजदूर व्यवस्था से बेहद खफा हैं। शहर में एटीएम कम संख्या में चल रहे हैं, जो चल रहे हैं, उन पर लंबी लाइनें हैं। दो हजार के लिए भी आम आदमी को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। नोटबंदी के बाद कदम को सही बताने वाली जनता ही सरकार पर हमलावर होने लगी है।
नोटबंदी को एक माह हो गया और जनता की समस्या सुलझने की बजाय उलझती जा रही है। जिन लोगों का न तो काले धन से मतलब और न ही राजनीति से कोई लेना देना, वह बैंकों की कतार में लगकर ऊब चुके हैं। आरबीआई का 24 हजार का दावा नो कैश में हवाई हो रहा है। एसबीआई की कुछ शाखाएं ही आदेशों का पालन कर पा रही हैं, बाकी बैंकों में में चार-पांच घंटे की लाईन के बाद पांच हजार ऐसे मिल रहे हैं, जैसे सरकार ने कोई खैरात दे दी हो।
हालात ये हैं जिन घरों में शादी है, जिन्हें भात देना है, कन्यादान देना है, उन्हें भी बैंकों से पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। भात में बहनों के यहां अच्छा-खासा पैसा देने की प्रथा है, लोग अपनी हैसियत के हिसाब से खर्च करते हैं। ऐसे में पांच-दस हजार मिलने पर आम आदमी परेशान हैं और रिश्तेदारियों में अपनी इज्जत बचाने को ईधर-उधर से पैसे जुटा रहा है। इन हालातों में व्यवस्था पर जमकर अपना गुस्सा निकाल रहा है। गुरुवार को शहर की एसबीआई की शाखाएं ही 24 हजार तक का भुगतान कर पाई। एसबीआई को मेरठ से कुछ पैसा मिल गया है। एचडीएफसी कोर्ट रोड के ब्रांच मैनेजर नितिन सौरभ ने बताया कि वह भी पूरा भुगतान कर रहे हैं।
लीड बैंक होते हुए भी पीएनबी के सामने नो कैश की समस्या बनी है। पीएनबी की शाखाओं पर ही लोग अधिक गुस्सा उतार रहे हैं। अन्य बैंकों में भी कैश की समस्या बरकरार है। शहर के एटीएम भी एसबीआई के ही चल पा रहे हैं। कुछ ही एटीएम चलने के कारण लंबी कतारे लगी हैं। मजबूरी में लोगों को दो हजार के लिए कतारों में लगना पड़ रहा है। बैंकों में कैश को लेकर जनपद के एलडीएम भी कोई खास जवाब नहीं दे पाए।