शुक्तिर्थ डंडी आश्रम में कथा व्यास का पूजन करते श्रदालु व कथा सुनते सन्त महात्मा।
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युगांतर तक जाना जाएगा भरत-श्रीराम का प्रेम व त्याग
मोरना। तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में देव मंदिर के 21वें वार्षिकोत्सव पर चल रही श्रीराम कथा में कथा व्यास ने बृहस्पतिवार को प्रभु श्रीराम व उनके भाई भरत के बीच प्रेम व त्याग का भावपूर्ण वर्णन किया।
स्वामी गुरु देवेश्वराश्रम महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीराम कथा के नवें दिन प्रयागराज से आए कथा व्यास सर्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम जब पिता दशरथ की आज्ञा शिरोधार्य करने के लिए वन गमन कर गए। उसके बाद ही भरत ननिहाल से अयोध्या लौटे, जहां उन्होंने पूरा वृत्तांत सुनने के बाद पिता के शव का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद बड़े भाई राम को वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट रवाना हो गए। कथा व्यास ने कहा कि भरत के हृदय में अयोध्या के चक्रवर्ती साम्राज्य का राजा बनने का तनिक भी लोभ नहीं आया और वे श्रीराम के वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने तक उनकी चरणपादुका को ही राजा मानकर अयोध्या का राजकाज चलाते रहे।
भरत का अपने भाई श्रीराम के प्रति यह प्रेम और त्याग युग-युगांतर तक जाना जाएगा। कथा व्यास ने कहा कि जो भी भक्त भरत के पावन चरित्र को श्रद्धा पूर्वक सुनते हैं, उन्हें इस भवसागर से वैराग्य हो जाता है। मनुष्य के अपने दैनिक जीवन में समय निकालकर श्रीराम कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए। बृहस्पतिवार को कथा आयोजन में अनीता देवी, देवेंद्र अग्रवाल, दीपाली, गोविंद, मनोहरलाल शर्मा, गंगादत्त शर्मा, योगेंद्र, रविंद्र, मदन गोपाल, सचिन गुप्ता, केडी शर्मा और हरि प्रकाश आदि का सहयोग रहा।