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दिव्या की निगाहें अब ओलंपिक पर लगी

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दिव्या की निगाहें अब ओलंपिक पर लगी
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मुजफ्फरनगर। पुरबालियान की बेटी पहलवान दिव्या काकरान ने चीन के एनिंग शहर में चल रही सीनियर एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक जीत कर एक बार फिर जनपद का नाम रोशन कर दिया। उसकी इस कामयाबी पर परिवार में खुशियां छाई है। देश-विदेश में एशियाड समेत विभिन्न प्रतियोगिताओं में अब तक दिव्या 68 पदक जीत चुकी है। अब उनकी निगाहें 2020 में जापान के टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों पर लगे है। वह ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना चाहती है, अपने इस सपने का साकार करने को वह जुटी हैै।
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मंसूरपुर के गांव पुरबालियान निवासी दिव्या काकरान ने बृहस्पतिवार को चीन के एनिंग शहर में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में अपने वर्ग भार 68 किलोग्राम में पहले वेतनाम की हॉन्य थॉय नजुयेन और फिर मंगोलिया की पहलवान ओलंपिक में रजत पदक विजेता बटसेटसेन सोरोन जॉन बोल्ड का हराकर देश के लिए कांस्य पदक जीता। बेटी की इस सफलता से उसके परिवार में खुशी का माहौल है। दिल्ली स्थित गोकलपुर आवास पर पिता सूरज पहलवान, दादा राजेंद्र पहलवान, दादी प्रेमवती, मां संयोगिता, भाई दीपक सेन को परिचितों ने बधाई दी। गांव पुरबालियान में भी दिव्या की कामयाबी से ग्रामीणों में हर्ष है। पिता सूरज पहलवान ने बताया कि दिव्या का सपना अब अगले वर्ष टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। 23 मार्च को उसने मंगोलिया में यू-23 सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। दिव्या ने गत वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में शानदार आगाज किया था। आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21 वें राष्ट्र मंडल खेलों में देश को ब्रांज मेडल दिलाया। इसके बाद इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए 18 वें एशियन गेम्स में उसने 68 किग्रा फ्री स्टाइल में भी कांस्य पदक जीता। दिव्या का यह पहला एशियाड था। इससे पहले वह एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता बनी। हरियाणा के भिवानी में हुए दंगल में भारत केसरी बनी थी। दिव्या अब तक 68 पदक जीत चुकी है।
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