भजनोपदेशिका संगीता आर्या को किया सम्मानित
जानसठ। आर्य समाज जंधेड़ी के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के शुभारंभ पर यज्ञ में मानवमात्र के सुख, शांति और समृद्धि को आहुतियां अर्पित की गई। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जिस देश का राजा चरित्रवान, संस्कारित होता है, उस मुल्क की संस्कृति और मर्यादा कभी नष्ट नहीं होती है। इस अवसर पर वैदिक संस्कृति की अमूल्य सेवाओं के लिए भजन गायिका संगीता आर्या को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मान राशि भेंट कर अभिनंदन किया।
क्षेत्र के गांव जंधेड़ी में आयोजित आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में पधारे आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि स्वराज के प्रेरक महर्षि दयानंद ने समाज सुधार और देश की संस्कृति की रक्षा को जीवन की आहुति दी थी। विश्व को वेदों की ओर लौटो का नारा दिया। सदाचरण, सद्गुणों और देशभक्ति से ऋषि के सपनों का भारत बनाए। आदिकाल से यह यज्ञ भूमि है, वेद-वेदांग की शिक्षा से आचरण था। वैदिक ज्ञान की उपेक्षा से पाखंड, अंधविश्वास, असुविधा बढ़ी और भारतीय संस्कृति को क्षति पहुंचाई गई। वेद हरपाल शास्त्री ने कहा कि यज्ञ से भौतिक, आध्यात्मिक कल्याण होता है। संतान संस्कारयुक्त बनती है। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि श्रेष्ठ संगति ही सत्संग है। सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, सेवा, पवित्र आचरण जैसे गुण अपनाना भी सत्संग है। भजनोपदेशक राजवीर आर्य, संगीता आर्य एवं सुकीर्ति आर्या ने प्रेरक भजन सुनाए। इस अवसर पर वैदिक संस्कृति की अमूल्य सेवाओं के लिए भजन गायिका संगीता आर्या को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मान राशि भेंट कर अभिनंदन किया। यज्ञमान दायित्व संजीव आर्य ने निभाया। सत्यपाल आर्य, वेदालंकार डॉ. देव शर्मा, महाश्य भूलेराम, पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह, श्री कृष्ण, अरविंद आर्य, नरेंद्र आर्य , धर्मेंद्र आर्य ने विचार रखे। संचालन पूर्व प्रधानाचार्य संतोष कुमार वर्मा ने किया।