सवालों के घेरे में डीआईओएस के फैसले
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड परीक्षा में सामूहिक नकल के खुलासे के बाद डीआईओएस दफ्तर की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में फंस गई है। सूबे में योगी सरकार को बने हुए दो साल पूरे नहीं हुए है, जबकि इस अवधि में जिले में तीन जिला विद्यालय निरीक्षक की तैनाती हो चुकी है। बारह महीने का चार्ज भी एक डीआईओएस के हिस्से में नहीं आ रहा है। सबसे पहले वीपी सिंह डीआईओएस बने, उसके बाद मुनेश कुमार को जिम्मा मिला। फिलहाल प्रवीण कुमार मिश्रा तैनात है।
मुनेश कुमार सपा सरकार में डायट के प्राचार्य भी रह चुके थे। माध्यमिक शिक्षा की जिम्मेदारी इसी महकमे पर है। कोई तो गड़बड़झाला है, जिसकी वजह से शासन को डीआईओएस बदलने पड़ रहे हैं। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के एसटीएफ को सीधी कार्रवाई के निर्देश के बाद चरथावल ब्लाक के बाढ़ गांव स्थित जनता इंटर कॉलेज में नकल माफिया के खेल का पर्दाफाश हुआ। फिर से स्थिति ऐसी बन गई है कि डीआईओएस प्रवीण मिश्रा पर सरकार की गाज कभी भी गिर सकती है। डीएम अजय शंकर पांडे के निर्देश पर सामूहिक नकल मामले में स्टेटिक मजिस्ट्रेट जिला सेवायोजना अधिकारी यूके शुक्ला और डीआईओएस प्रवीण मिश्रा की भूमिका की जांच सीडीओ आईएएस अर्चना वर्मा कर रही हैं। जांच में क्या सच सामने आएगा, इसका अंदाजा तो नहीं लगाया जा सकता। इसमें कोई दोराय नहीं है कि बोर्ड परीक्षा कराना डीआईओएस दफ्तर की बड़ी कमाई का जरिया बन गया है। एक डीआईओएस का कार्यकाल जिले में केवल इतना है कि वह एक बोर्ड परीक्षा अपने निर्देशन में करा सके। डीआईओएस की जिले में पोस्टिंग पाने की मारामारी की एक वजह बोर्ड परीक्षा भी है। नकल माफिया कमर इंतखाब और उसके भाई असर नफीस उर्फ अख्तर ने फेल विद्यार्थियों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी से पास कराने का इतना बड़ा नेटवर्क ऐसे ही खड़ा नहीं कर लिया। डीआईओएस दफ्तर ने शासनादेशों को ताक पर रख दिया, जिसकी वजह से बीते डेढ़ दशक में खुड्डा गांव के डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य कमर इंतखाब की सल्तनत पर हाथ डालने की किसी में हिम्मत नहीं हुई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बोर्ड परीक्षा में नकल पाए जाने पर डीएम और डीआईओएस के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। नकल माफिया और केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्य योगेंद्रपाल सिंह सहित 17 आरोपी जेल जा चुके है। डीएम अजय शंकर पांडे के मुताबिक इंटरमीडिएट विज्ञान वर्ग परीक्षा में पकड़ी गई सामूहिक नकल मामले में सीडीओ की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। दोषी जो भी होगा, शासन को कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी।
संदेह के घेरे में कई सवाल
एक: बोर्ड परीक्षा के शासनादेशों के आधार पर गैर राज्य और गैर बोर्ड से प्राईवेट फार्म भरने वाले हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों का सेंटर मुख्यालय पर लगाया जाना था। आखिर क्यों चरथावल ब्लाक के अंतिम गांव बाढ़ के जनता इंटर कॉलेज को परीक्षा केंद्र बना दिया।
दो: जेडी बालेंदु भूषण सिंह और डीआईओएस प्रवीण मिश्रा ने बाढ़ परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया। उसी दिन द्वितीय पाली में फिजिक्स के पेपर में नकल गिरोह पकड़ा गया। एग्जाम सेंटर की गतिविधियां शिक्षा अफसर को संदिग्ध क्यों नहीं लगी?
तीन: परीक्षा से पूर्व सभी सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे और वॉयस रिकार्डर को दुरुस्त करने की रिपोर्ट सरकार को भेजी गई। बाढ़ सेंटर पर डीआईओएस ने खराब वॉयस रिकार्डर चेक क्यों नहीं कराए?
चार: परीक्षा सेंटर बाढ़ पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त थे। पुलिस फोर्स भी लगी थी, फिर कैसे नकल गिरोह के 14 सॉल्वर सेंटर के परीक्षा कक्ष में पहुंच गए?