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क्राइम कैपिटल में खिल रहे समृद्धि के फूल

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पाली हाउस लगाने में प्रदेश में पहले नंबर पर जिला मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर । मुजफ्फरनगर जिला तरक्की की सीढ़ियां भी चढ़ रहा है। कारोबारी गतिविधियों में बुलंदियां छूने के साथ ही जिले के किसानों ने फूलों की खेती को बढ़ावा दिया है। यहां बड़े स्तर पर फूलों की खेती होती है। कुछ किसान खुले खेतों में फूल उगाते हैं तो कुछ ने पाली हाउस लगा रखे हैं। उद्यान विभाग के अधिकारियों का दावा है कि मुजफ्फरनगर जनपद पाली हाउस लगाने के मामले में पहले स्थान पर है। 80 प्रतिशत पाली हाउस में फूलों की खेती होती है। जिले में विशेष रूप से गुलाब, गेंदा, जरबेरा और रजनीगंधा की खेती होती है।
करीब 1500 हेक्टेयर में फूलों की खेती
मुजफ्फरनगर । जनपद में करीब 1500 हेक्टेयर में फूलों की खेती हो रही है। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 500 हेक्टेयर में गेंदा और गुलाब और एक हजार हेक्टेयर में ग्लेडियोलस, जरबेरा और रजनीगंधा उगाया जा रहा है। जिले में 60 पाली हाउस विभाग से अनुदान देकर लगाए गए हैं। यह तो सरकारी आंकड़ा है, जबकि वास्तविक रूप से और बहुत से किसान फूलों की खेती से जूड़े हैं।
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दिल्ली करते हैं सप्लाई
मुजफ्फरनगर की धरती पर उगने वाले फूलों की सप्लाई ज्यादातर दिल्ली होती है। फूलों की खेती के मामले में मीरापुर, खतौली, जानसठ, तितावी समेत कई क्षेत्र अग्रणी हैं। दिल्ली नजदीक होने के कारण यहां से सप्लाई आसानी से हो जाती है और दाम भी अच्छे मिल जाते हैं।
1987 से कर रहे फूलों की खेती
खतौली क्षेत्र के गांव गंगधाड़ी निवासी सतीश चौहान का कहना है कि वह सन 1987 से फूलों की खेती कर रहे हैं। उस समय तो क्षेत्र में ग्लेडियोलस को लोग जानते भी नहीं थे। ग्लेडियोलस और रजनीगंधा उगाते हैं। फूलों की पूरी सप्लाई दिल्ली करते हैं। वर्तमान में उन्होंने करीब 40 बीघा जमीन पर फूलों की खेती कर रखी हैं। जबकि इस गांव के आसपास करीब 500 बीघा जमीन पर फूलों की खेती होती है। उनके पुत्र राहुल चौहान भी उनके साथ फूलों की खेती करते हैं। इनके अलावा इस क्षेत्र के सर्वेश कुमारा, जसवीर सिंह, उधम सिंह आदि भी फूलों की खेती कर रहे हैं। पाली हाउस पर मिलता है अनुदान
पाली हाउस में किसी भी मौसम में कोई भी फसल उगाई जा सकता है। उद्यान विभाग पाली हाउस लगाने के लिए अनुदान देता है। शाक भाजी के लिए एक एकड़ पाली हाउस पर 5.60 लाख लागत आती है, जबकि गुलाब और जरबेरा पर क्रमश: 17 और 24 लाख रुपये लागत आती है। लागत का 50 प्रतिशत उद्यान विभाग से अनुदान मिलता है। जिला उद्यान अधिकारी एसी पाठक ने बताया कि एक एकड़ पाली हाउस में फूल उगाने पर प्रतिवर्ष आठ से 10 लाख तथा सब्जी की खेती पर लगभग छह से सात लाख रुपये की बचत होती है।
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जिले में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है। पाली हाउस लगाने में जनपद का पहला स्थान है। किसानों को इस खेती से अच्छी आमदनी हो रही हैं इसलिए इसे अपना रहे हैं। विभाग से पाली हाउस पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
- एसी पाठक, जिला उद्यान अधिकारी।
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