हादसे का वो भयावह मंजर नहीं भूलता
खतौली (मुजफ्फरनगर)।
पिछले साल की 19 अगस्त को पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में 26 मुसाफिरों की जान चली गई थी। उत्कल हादसे ने तमाम परिवारों को कभी नहीं भरने वाला जख्म दे गया है। हादसे में किसी की गोद सुनी हो गई थी तो किसी के सिर से मां-बाप का साया उठ गया था। किसी का सुहाग ही उजड़ गया था। प्रत्यक्षदर्शी मनोज बालियान बताते हैं कि यात्रियों की चीखपुकार आज भी कानों में गूंजती है।
खतौली में उत्कल एक्सप्रेस हादसा बड़ी रेल दुर्घटनाओं से जुड़ा है। पिछले साल 19 अगस्त को शनिवार का दिन था। पुरी से वाया निजामुद्दीन होकर हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस खतौली में तहसील के सामने ट्रैक से उतर कर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। दिल्ली कंट्रोल रूम से ब्लॉक लिए बिना रेलवे के जेई और अन्य कर्मचारियों ने मेरठ-टपरी मुख्य ट्रैक पर क्रेक पटरी को काट दिया था। शाम का वक्त था। ट्रेन आती दिखाई दी तो रेलवे कर्मी ट्रैक छोड़ कर भाग गए। ऐसे में एक सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही उत्कल के डिब्बे डिरेल होकर हवा में उछल गए। बोगियां आसपास के मकानों में घुस गई थी। 11 डिब्बे तहस-नहस हो गए थे। बोगी एक दूसरे पर चढ़ गई थी। हादसे में 26 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि सौ से अधिक घायल हो गए थे। ट्रेन में सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार तीर्थ जा रहे यात्रियों की अधिक भीड़ थी। वो वीभत्स मंजर आज भी डराता है। जगत कालोनी, नई आबादी, शिवपुरी, विष्णुपुरी की आवासीय आबादी रेलवे ट्रैक के दोनों ओर है। यहां के बाशिंदे आज भी धड़धड़ाकर तेज निकलती ट्रेनों की आवाज से कांप उठते हैं। हादसे के साक्षी चौधरी जगत सिंह बताते है कि दुर्घटना के वक्त वो घर के बाहर बैठे थे, तभी उत्कल ट्रेन के डिब्बे ट्रैक से उतर कर बिखर गए। उनके घर में भी एक बोगी घुस गई, जिससे वह भी घायल हो गए थे। परिवार में बड़ा हादसा भी हो सकता था। मनोज बालियान कहते हैं कि यात्रियों की चीख पुकार आज भी कानों में गूंजती है। रात में ट्रेन की रफ्तार से आंखें खुल जाती है। पंकज, अवंत और राजीव अहलावत का कहना है कि अब भी जब उत्कल एक्सप्रेस ट्रैक से शाम को निकलती है, तो सोच कर दिल कांप उठता है।
आज भी घटनास्थल पर पड़ी हैं 10 क्षतिग्रस्त बोगियां
खतौली। ट्रैक के करीब हादसे के दस क्षतिग्रस्त डिब्बे पड़े है। हालांकि दुर्घटना के बाद नई लाइन बिछाई गई, क्योंकि मेरठ-टपरी के बीच रेलवे दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। पांच माह पहले इन बोगियों को क्रेन के द्वारा एक तरफ रखवा दिया गया था। एक बोगी को दिल्ली ले जाया गया है। बतातं चले कि उत्कल की 21 में से 11 बोगियां हादसे का शिकार बनी थी। जिज्ञासावश आज भी यहां से गुजरते ट्रेन यात्री इन डिब्बों को देख हादसे का जिक्र करते हैं।
निलंबित रेलवे कर्मी हो चुके बहाल
खतौली। प्रशासन की पहल से हादसे के शिकार कई यात्रियों की जान बच गई थी। तत्कालीन डीएम जीसी प्रियदर्शी ने स्वास्थ्य विभाग की सैकड़ों एंबुलेंस लगवा कर घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती करवाया था। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा घटना की रात ही मौके पर पहुंच गए थे। रेलवे मंत्रालय ने मामले की जांच रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) एसके पाठक से कराई थी। निलंबित किए गए रेलवे कर्मचारी अब बहाल हो चुके हैं। जेई प्रदीप का तबादला हरियाणा प्रांत कर दिया गया है।
लंबित पड़ा मुकदमा, सीओ रेलवे पर जांच
मुजफ्फरनगर। उत्कल रेल हादसे का मुकदमा जीआरपी थाने पर तत्कालीन खतौली चौकी प्रभारी एसआई अजय कुमार की ओर से अज्ञात में दर्ज कराया गया था। एक साल बाद भी मुकदमे की जांच पूरी नहीं हो सकी है। सीओ रेलवे गाजियाबाद को जांच सौंपी गई थी। जीआरपी थाना प्रभारी निरीक्षक किशन अवतार सिंह ने बताया कि इस मुकदमे की जांच सीओ गाजियाबाद रितेश सिंह कर रहे हैं, जो आज भी लंबित है। जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है।