जयंत चौधरी को पुराने समीकरण की तलाश
मुजफ्फरनगर। रालोद ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों की दस्तक दे दी है। कैराना लोकसभा से गठबंधन प्रत्याशी की जीत के बाद पार्टी अपने जाट-मुस्लिम समीकरण को बनाने में जुटी है। पांच साल पहले हुए दंगे ने रालोद को हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया था। लंबे अरसे के बाद जयंत चौधरी ने नंगला मंदौड और जौला में दो रैलियां रखी हैं, ताकि जाट और मुस्लिमों के मन को पढ़ सकें।
संसदीय चुनाव को लेकर रालोद ने भी अपने सियासी रण में तैयारी का आगाज कर दिया है। कैराना के लोकसभा उपचुनाव में गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम बेगम रालोद के चुनाव चिह्न पर जीती थी। पार्टी को दंगे में बिखर गया जनाधार एकजुट होता दिखाई दिया। जाट और मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद जयंत चौधरी आज जिले में दो रैलियां करेंगे। खास बात यह है कि कवाल कांड के बाद जिस नंगला मंदौड़ के मैदान में हिंदू महापंचायतें हुई थी, वहीं रैली कर जयंत चौधरी ने जाटों को एकजुट करने की ठानी है। बुढ़ाना के जौला में सात सितंबर 2013 की हिंसा के बाद मुस्लिमों ने शरणार्थी कैंपों में शरण ली थी। रालोद ने दूसरी रैली मुस्लिमों के बीच रखी है। पार्टी का मकसद अपने परंपरागत चुनावी गणित को पूरी तरह समझने का है। सियासी लिहाज से भले ही कैराना में लोकसभा का उपचुनाव जीतने से पार्टी को हौसला मिला, मगर जिले में रालोद के लिए ताकत जुटाना चुनौती भी बना हुआ है। सांसद से लेकर विधायक और जिला पंचायत तक भाजपा का वर्चस्व है। हालांकि दंगे के बाद जयंत चौधरी ने गांव-गांव घूमकर किसानों से न केवल सीधा संवाद जोड़ा, बल्कि संगठन को भी ताकत दी। नंगला मंदौड़ और जौला की रैलियों से पार्टी की आगे की रणनीति तय होगी।
रालोद कार्यकर्ताओं ने झोंकी ताकत
मुजफ्फरनगर। रालोद नेता जयंत चौधरी शुक्रवार सुबह 11 बजे जानसठ के नंगला मंदौड़ में पहुंचेंगे। पश्चिम प्रभारी राजकुमार सांगवान और लोकसभा प्रभारी सुरेश मलिक ने बताया कि रैली के बाद वे बुढाना के जौला जायेंगे जहां दो बजे उनकी सभा होगी।