मोरना। संत की सरलता और सादगी ने भागवत भक्तों को उनके प्रति श्रद्धा एवं भक्ति के अटूट स्नेह से जोड़ दिया था। बीते तीस साल से शुक्रताल आ रही वृद्धा शांति गोयनका स्वामी कल्याणदेव की श्रद्धांजलि सभा में पटना से आई। अपनी पौत्री मेघा के साथ शुकदेव आश्रम में ठहरी शांति ने बताया कि वीतराग संत की कृपा से ही जीवन की मुश्किलें हल हुई।
शिक्षा ऋषि की स्मृति को नमन करने के लिए देश के अलग-अलग प्रांतों से श्रद्धालु आये। पटना से 83 साल की शांति गोयनका अपनी पौत्री मेघा के साथ पहुंची। उन्होंने बताया कि उनके पति बाबूलाल म्यामार के रंगून में बिजनेस करते थे। कुछ अड़चने आई और उन्हें कोलकाता में आना पड़ा, लेकिन कारोबार नहीं चला। विपत्ति के समय एक रिश्तेदार ने शुकतीर्थ में यात्रा का प्रस्ताव दिया। मुरारी बापू की शुक्रताल में हुई पहली कथा में वह आई और स्वामी कल्याणदेव के दर्शन किये। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, फिर भी उन्होंने कहा कि बेटी आश्रम में एक भवन बनाओ। असमंजस में देख बोले धन मै दूंगा, बस संकल्प करो। उन्होंने मुझे अपनी बेटी मान लिया। तब से आज तक मै उनकी स्मृति शुक्रताल आ रही हूं। मेघा गोयनका ने बताया कि तब वह बहुत छोटी थी, स्वामी जी गले माला पहनाते तो अद्भुत अनुभूति होती थी। उज्जैन से आये पवन उपाध्याय ने कहा कि उज्जैन कुंभ में कर्मयोगी संत के पहली बार दर्शन मिले। मध्य प्रदेश में उनके अनुयाइयों की बड़ी संख्या है। हरियाणा से आये संत के शिष्य एवं हिसार यूनिवर्सिटी के वित्त नियंत्रक पंडित श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि उनकी शिक्षा का खर्च पूज्य संत ने ही उठाया था।
मेधावी बच्चों को किया गया सम्मानित
मोरना। शिक्षा ऋषि की पुण्यतिथि पर उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में टॉपर बच्चों को स्वामी ओमानंद सरस्वती ने सम्मानित किया। पुरस्कृत बच्चों में हाई स्कूल से अनुज कुमार, भावना राणा, दीपांशी, रिया, मुकुल शर्मा, तनु पाल, शिवानी, तनु राठी, सानिया शामिल रहे। 12वीं के सफल मेधावियों में उस्मान, राहुल, राखी, निधि वर्मा, मनीष, अदिति, विशाखा, तरन्नुम परवीन को सम्मानित किया गया। मुमताज अली, ब्रजवीर सिंह, मनोज राठी, अमित राठी, विनोद शर्मा, नवीन चौधरी, सतेंद्र प्रधान मौजूद रहे।