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भगवान....दोबारा ना दिखाए ऐसा मनहूस दिन

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भगवान.! दोबारा नहीं दिखाए ऐसा मनहूस दिन
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मुजफ्फरनगर।
रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन के दौरान बेकाबू भीड़ से हक्की-बक्की पुलिस ने जैसे ही नेतृत्व में दिख रहे नेताओं को हिरासत में लिया, वैसे ही नईमंडी कोतवाली पर हमला हो गया। थाने के बाहर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ मची और आग का धुआं उठने लगा। बैंक के एटीएम को उपद्रवियों ने तहस नहस कर दिया। बवाल में सबसे ज्यादा आगजनी और उपद्रव का शिकार बने नईमंडी क्षेत्र के व्यापारी और नागरिक अभी भी सोमवार के हालात को सोचकर सहमे हुए हैं।
जीआईसी के मैदान में जुटी हजारों की भीड़ अचानक दीवार लांघ कर रेलवे ट्रैक पर आ गई। झंडे और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने कोच्चिवेली एक्सप्रेस को प्लेटफार्म से छूटते ही जानसठ फ्लाईओवर के नीचे रोक लिया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ देख जीआरपी और आरपीएफ के भी होश उड़ गए। ट्रेन रोकने की सूचना पर डीएम और एसएसपी पहुंच गए। विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच नेतृत्व कर रहे कुछ नेताओं को गिरफ्तार करना भारी पड़ गया। जैसे ही उन्हें हिरासत में लेकर नईमंडी कोतवाली में रखा गया, वैसे ही भीड़ ने रेलवे ट्रैक को छोड़कर नईमंडी का रुख कर लिया। ट्रैक के बराबर में कोतवाली का थाना है, उस वक्त थाने में अधिक पुलिस फोर्स भी नहीं था। हजारों की भीड़ ने थाने से लेकर बाहर तक तोड़फोड़ मचा दी। पीएनबी के एटीएम को तहस-नहस कर दिया। पुल के नीचे खड़े में वाहनों में आग लगा दी गई। आसपास का बाजार बंद हो गया। अपनी दुकानें बचाने के लिए व्यापारी जुट गए। कोई भी बेकाबू भीड़ को नियंत्रण करने की स्थिति में नहीं था। उपद्रव के दौरान सबसे ज्यादा आगजनी और नुकसान यहीं हुआ है। गनीमत यह रही कि आसपास की बस्ती में उपद्रवी नहीं पहुंच पाए। सोमवार को हुए बवाल का असर जानसठ फ्लाईओवर के नीचे साफ दिख रहा है। बाजारों की रौनक खत्म दिखाई दी। क्या व्यापारी और नागरिक सभी सहमे हुए हैं। उपद्रव तो बीत गया, लेकिन थाने की बिल्डिंग और कतारबद्ध खड़े फूंके वाहन हालात को बयां कर रहे हैं। रेलवे ट्रैक से लेकर कोतवाली मंगलवार को भी जर्रा-जर्रा दहशत में दिखाई दिया। नई मंडी निवासी बबीता चौधरी ने बताया कि सुबह शोरशराबा सुना था, कुछ युवकों की भीड़ हाथों में डंडे लिए टहलती रही। कुछ समय बाद हालात ऐसे हो गए कि घर तो दूर खिड़कियां तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
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बच्चों को लेकर एक कमरे में कैद हो गए। व्यापारी मनोज कुमार ने कहा कि भारत बंद के एलान पर दुकान बंद कर दी थी, सोचा दोपहर बाद स्थिति सामान्य होगी तो कारोबार कर लेंगे। अचानक 500-700 युवकों की डंडे-सरिया, लोहे की रॉड, पाइप हाथों में लिए पुल के नीचे उपद्रव हो गई। कुछ युवक कोतवाली के बाहर खड़े वाहनों में आग लगाते चले गए। एक-एक करीब सभी धू-धू कर जलने लगे और भयंकर धुआं उठा। पुलिस ने काबू करने की कोशिश की, लेकिन पुल के ऊपर से गोलियों की तरह पत्थर बरसाए गए। पीएनबी बैंक अधिकारी सतेंद्र कुमार जैन ने बताया कि दो अप्रैल को बैंकों में वार्षिक लेखाजोखा का कार्य था, आम उपभोक्ता नहीं थे। अचानक बैंक के बाहर ही एटीएम के शीशे टूटने की आवाज आई तो कर्मी दौड़कर पहुंचे। हजारों की तादात में खड़े युवकों को देखकर लौट गए। इसके बाद भीड़ आगे की ओर बढ़ती गई। जानसठ रोड पर डिपो की बस पर गुरिल्लावार में हमला किया गया। चालक विकास चौधरी और परिचालक अजय बताते हैं कि एक-एक युवा शीशे तोड़ते गए। कुछ रुक गए तो कोई आगे बढ़ गए। बाद में पीछे से बस को आग के हवाले कर दिया। युवकों की रोकने की वह हिम्मत नहीं जुट सके। ऐसा उपद्रव जिंदगी में पहली बार देखा है। उपद्रव से दहशत में आए नईमंडी क्षेत्र के लोग भयभीत रहे, सिर्फ जुबां पर एक ही शब्द आए कि भगवान जीवन में कभी दोबारा ऐसा मनहूस दिन ना दिखाए।
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