सामूहिक विवाह योजना का 3.39 करोड़ सरेंडर
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार की अनुदान की बड़ी योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का तीन करोड़ 39 लाख 60 हजार रुपया विभाग ने 31 मार्च को सरेंडर कर दिया। इसी के साथ समाज कल्याण की शादी-विवाह अनुदान योजना के लिए आया 40 लाख बीस हजार रुपया भी वापस किया गया। योजनाओं के प्रचार प्रसार के अभाव में आम जनता की इन योजनाओं की धनराशि सरेंडर करना पड़ी।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार ने सबसे पहले 476 शादी का पैसा जारी किया था। इस योजना में एक शादी पर 35 हजार खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था। विवाह की तिथि दो बार आगे बढ़ानी पड़ी। इसके बाद चार दिन पूर्व हुए सामूहिक विवाह योजना के लिए 443 की संख्या ही पूरी की जा सकी। विवाह के दिन इनमें से छह जोड़ी समारोह में शामिल नहीं हो पाई। इस प्रकार केवल 437 की ही शादी हो पाई। बाकी 39 का पैसा छह लाख पांच हजार विभाग ने सरेंडर किया। प्रदेश सरकार ने इसी बीच 953 सामूहिक विवाह के लिए तीन करोड़ 33 लाख 55 हजार और जारी कर दिया। जिला प्रशासन सर्व प्रथम आए पैसे का ही प्रयोग नहीं कर पाया था, इस कारण समाज कल्याण विभाग को 953 का समस्त पैसा और बचे टारगेट के 39 शादियों का पैसा वापस करना पड़ा। सामूहिक विवाह योजना में कुल तीन करोड़ 39 लाख 60 हजार सरेंडर करना पड़ा। जिला समाज कल्याण अधिकारी मौहम्मद कासिम ने बताया कि इसके अलावा शादी-विवाह अनुदान का पैसा भी वापस हुआ है। इस योजना में पात्र को लड़की की शादी के लिए 20 हजार का अनुदान दिया जाता है। योजना में एससी की शादी के लिए 526 शादी के लिए एक करोड़ 52 लाख आया था। योजना में 111 शादी का पैसा खर्च नहीं होने पर बचा हुआ 22 लाख 20 हजार वापस किया गया। इसी तरह सामान्य जाति के लिए 160 शादी को 32 लाख आया था। इसमें भी पात्र के नहीं मिलने पर 18 लाख सरकार को वापिस करना पड़ा। उधर, शनिवार को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन होने के कारण कुछ दफ्तरों में देर शाम तक कार्य होते रहे। एडीएफ सियाराम मौर्य ने बताया कि अधिकतम योजनाओं का धन विभागों द्वारा भेजे गए पात्रों के खाते में आता है, इसलिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अलावा अन्य किसी विभाग में वित्त वर्ष में योजना का धन अवशेष नहीं बचा है।