घाटे में चल रही रोडवेज बस डिपो को उबारने की कोशिश
खतौली। प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री के सख्त आदेश के बाद घाटे में चल रही रोडवेज बस डिपो को उबारने के लिए अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों के प्रयास से डिपो ने एक वर्ष में एक करोड़ रुपये का घाटा पूरा कर दिखाया है। पिछले वर्ष डिपो को मात्र 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
रोडवेज बस डिपो के एआरएम रणजीत सिंह के मुताबिक इस डिपो में 74 बसों का संचालन होता है, जिनमें से चार अनुबंधित बस हैं। पिछले कई सालों में इस डिपो ने सरकार को आमदनी का एक रुपया भी कमाकर नहीं दिया। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के सभी रोडवेज डिपो की बात करें तो खतौली डिपो आमदनी के मामले में हमेशा फिसड्डी ही रही है। पिछले वर्ष माह जून में प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने डिपो का निरीक्षण किया था। उस वक्त मंत्री ने यहां तक कह दिया था कि अगर अगले वर्ष डिपो ने आमदनी नहीं की तो, उनको इस डिपो को बंद करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष माह अप्रैल से जनवरी तक 74 रोडवेज बसों के चालकों ने आमदनी बढ़ाने को इतनी तेजी से पहिया घुमाया कि डिपो का प्रतिवर्ष होने वाला एक करोड़ रुपये का घाटा पूरा कर दिखाया। इतना ही नहीं कुछ खस्ताहाल बसें होने पर भी चालकों ने घाटा पूरा करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। एआरएम के मुताबिक अब घाटा घटकर प्रतिवर्ष का मात्र 22 लाख रुपये रह गया है। डिपो से संचालित होने वाली बसों के पहिये इसी रफ्तार से चलते रहे तो सरकार को इस डिपो को बंद करने की नौबत नहीं उठानी पड़ेगी।
प्रमुख सचिव भी डिपो के कार्यों से संतुष्ट नहीं थी
प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला ने पिछले हफ्ते रोडवेज बस डिपो का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान खस्ताहाल बसों और कार्यशाला में कर्मचारियों के कार्यों को लेकर नाराजगी जताई थी। प्रमुख सचिव ने डिपो में सुधार लाने के लिए आरएम को यहां तक कह दिया था कि वे खुद एक माह तक डिपो को चलाएंगे। इस दौरान एआरएम व फोरमैनों तक को प्रमुख सचिव की डांट सुननी पड़ी थी।
-डिपो की आमदनी बढ़ाने के लिए बसों का रूट बढ़ाया जाएगा। डिपो की बसों को आसपास के गांवों में भी संचालित की जाएगी। एक वर्ष में एक करोड़ का घाटा पूरा किया है। बाकी 22 लाख रुपये का घाटा पूरा करते हुए सरकार को अगले वर्ष आमदनी का हिसाब भी देने के भरसक प्रयास किए जाएंगे।
रणजीत सिंह, एआरएम।