मुजफ्फरनगर। वैश्य अग्रवाल राजवंश सभा मुजफ्फरनगर की ओर से गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। सभा के कार्यालय पर मंत्री योगेश कुमार गुप्ता और महिला सभा की मंत्री अनुराधा गुप्ता ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। दीपा गुप्ता और बच्चों ने देश भक्ति गीत और कविताएं सुनाई। इस दौरान शहीदों का नमन किया गया। बच्चों को गणतंत्र दिवस के बारे में बताया गया। इस अवसर पर राजवंश मयूरी प्रतियोगिता भी कराई गई। गौरी, सेजन, आरिणी, आस्था आदि ने भाग लिया। निर्णायक मंडल ने आस्था को विजयी घोषित किया। सभा के पदाधिकारियों ने उसे पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में दिनेश कुमार गर्ग, बिंदिया मित्तल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुलदीप गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद गर्ग, जगमोहन, सुुधीर ऐरन आदि मौजूद रहे।
जिला कारागार में कवि सम्मेलन और मुशायरा हुआ
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में भी राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान कवि सम्मेलन और मुशायरा भी कराया गया।
कारागार के मुख्य द्वार पर जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने ध्वजारोहण किया गया। ’’समर्पण’’ के तत्वावधान में कारागार में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआा। अब्दुल हक सहर, डॉ मुकेश दर्पण, गोपाल सिंह, जख्मी, ईश्वर दयाल गुप्ता गीतकार, शाहिद जिगर, राकेश दुलारा द्वारा बंदियों के मध्य शायरी और काव्यपाठ किया गया। बंदियों ने उत्साहपूर्वक सुना गया। जेल में बंद बंदी फिरोज ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन गीतकार ईश्वर दयाल ने किया। संयोजक अविनाश त्यागी रहे। जेल अधीक्षक एके सक्सेना एवं जेलर एएन त्रिपाठी ने सभी का आभार जताया।
कवि सम्मेलन और मुशायरें में जख्मी मुजफ्फरनगर ने पढ़ा- तू वतन के दुश्मन से दोस्ती नहीं करना। शाहिद जिगर ने कहा-ये नेक काम भी सैय्याद करता रहता है, परिंदे कैद से आजाद करता रहता है। राकेश दुलारा ने सुनाया- झंडा मेरा गगन लहराये हवा में फहराए, ये भारत मॉ की शान है, जिसके साये में समाया हिंदुस्तान है। ईश्वर दयाल गुप्ता का गीत-मेरे देश का हर जवान, हीरा है, मोती है, मैं तिरंगे की लपटों से, तेरे कद को सलाम करता हूॅ। अब्दुल हक सहर ने कहा-सच्चाईयों का जब कहीं दपर्ण दिखाई दे, सूरत खराब क्यों हुई कारण दिखाई दे। डॉ मुकेश दर्पण ने कहा- रहूं भूखी मगर हर हाल में मैं मुस्कुराती हूॅ, मैं शेखर और भगत सिंह की कथा सबको सुनाती हॅू, मैं भारत मां की बेटी हूॅ भगत सिंह की मैं माता हूॅ, तिरंगा बॉधकर सर से, कफन उसका बनाती हूं।