नलकूप और हैंडपंप का पानी पीने लायक नहीं
मुजफ्फरनगर। भंडूरा-धनेड़ा नाले में दूषित जल छोड़ने वाली फैक्ट्रियों के कारण आसपास का भूजल भी प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि खेतों में बनी किसानों की ट्यूबवेल और फैक्ट्रियों के निकट लगे हैंडपंप पानी के बजाय जहर उगल रहे हैं। नलकूपों का पानी भी प्रदूषित है। प्रदूषण विभाग ने जांच-पड़ताल कर ट्यूबवेल के पानी को मनुष्यों के साथ पशुओं के लिए भी घातक बताया है। बाकायदा इसकी ट्यूबवेलों पर सूचनाएं लिखवाई गई है।
भंडूरा और धनेड़ा के नाले में 33 फैक्ट्रियों का पानी डलता है। इनमें पेपर मिल्स, केमिकल फैक्ट्री के साथ अनेक फैक्ट्रियां शामिल हैं। दोनों नालों का विलय जानसठ रोड पर गुलशन फैक्ट्री के निकट होता है। यहां से दोनों बहते हुए शहर का भी पानी लेकर पुरबालियान क्षेत्र में काली नदी में मिलते हैं। कूकड़ा क्षेत्र में प्रदूषित नालों के पानी का दुष्प्रभाव भूगर्भ पर भी पड़ रहा है। भूजल प्रभावित होने से किसानों को भी नुकसान है। धनेड़ा-भंडूरा नाले में दूषित जल के कारण किसानों के नलकूप का पानी भी जहरीला हो गया है। नलकूपों से पीला पानी निकल रहा है। इससे फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रदूषण विभाग ने जांच-पड़ताल कर ट्यूबवेलों के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
विभाग ने ट्यूबवेलों के पानी को इंसानों के साथ फसलों, पशुओं के लिए भी नुकसानदेह बताया है। इसके लिए ग्रामीणों की ट्यूबवेलों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। प्रदूषण विभाग के अधिकारी विपुल कुमार ने बताया कि जांच-पड़ताल की जा रही है। विभाग को जहां पर संदेह है, उन ट्यूबवेलों से पानी के सैंपल लिए गए हैं। लैब में जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
हैंडपंप भी उगल रहे जहर
मुजफ्फरनगर। प्रदूषण विभाग ने फैक्ट्रियों के निकट लगे हैंडपंपों की भी जांच-पड़ताल की है। लगून डिस्टलरी आदि के निकट पानी की सैंपलिंग की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हैंडपंप का पानी भी जहर के समान है। हैंडपंपों का पानी किसी भी दशा में पीने लायक नहीं है। इन हैंडपंपों में पीएच की मात्रा कहीं पर 7.4 तो कहीं 7.6 मिली है, जबकि टीडीएस 264 और 204 तक पाया गया है।
ट्यूबवेल में टीडीएस मिला 500 के पार
मुजफ्फरनगर। प्रदूषण विभाग ने ट्यूबवेलों के पानी की सैंपलिंग लेकर लैब में जांच की है। जांच में पानी खतरनाक स्टेज पर मिला है। ट्यूबवेल के पानी में पीएच 7.3, 7.2 और टीडीएस 416, 534, सल्फेट की मात्रा 31 और 38 तक पाई गई है। जांच के बाद ट्यूबवेलों पर नोटिस लगाए गए हैं।