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शनि-राहू किसी का भला बुरा नहीं करते: ज्ञानसागर

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अहिंसा से ही होगा आतंकवाद का खात्मा
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मुजफ्फरनगर। जैन आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि वैज्ञानिक युग में युवा पीढ़ी को अंधविश्वास, पाखंडों से दूर रहना चाहिए। आचार्य ने संत महात्माओं को विलासिता पूर्ण जीवन से दूर रहने की सलाह दी। यह भी कहा कि भौतिकता के प्रभाव में कुछ साधु संत भटक जाते हैं। उन्होंने कहा कि अहिंसा से ही आतंकवाद का खात्मा हो सकता है।
श्री दिगंबर जैन अतिशय मंदिर में जैन आचार्य ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि युवा पीढ़ी को वाह्य चमत्कारों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। शनि-राहू किसी का भला-बुरा नहीं करते। काल सर्प योग कुछ नहीं होता। अंगूठी पहनने से कोई चमत्कार नहीं होता। हम वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं, हर बात को वैज्ञानिक तरीके से सोचें। अपना जीवन, नैतिकता, सदाचार और ईमानदारी के साथ जीयें, कोई बाधा नहीं आएगी। पाखंड और अंधविश्वास से दूर रहकर ही जीवन में तरक्की कर सकते हैं।
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जैन मुनि ने कहा कि संत-महात्मा को हमेशा विलासिता से दूर रहना चाहिए। संत का लक्ष्य आत्म साधना होना चाहिए। समाज को तनाव मुक्ति का मार्ग दिखाएं। सदाचार, नैतिकता की शिक्षा देना उद्देश्य होना चाहिए। आचार्य ने कहा कि भक्तजन ही आज साधुओं के जीवन में बाधक बन रहे हैं। आतंकवाद का खात्मा अहिंसा के रास्ते से ही होगा। दुनिया में बहुत से देशों में हिंसा हो रही है, किसी भी देश में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्धांतों पर चलकर मैत्रीपूर्ण तरीके से ही शांति स्थापित होगी। इस्लाम में भी कहीं किसी को कष्ट पहुंचाने की बात नहीं लिखी। युद्ध से सभी पक्षों को हानि होती है।
ज्ञान सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म का जिस तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। नियमों में बौद्ध धर्म में शिथिलता दी गई, भगवान बुद्ध ने मध्यम मार्ग अपनाया, जैन धर्म में इसे स्वीकार नहीं किया गया। जैन धर्म के ग्रंथ आज जर्मन में सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। अमेरिका में 70 सेंटर चल रहे हैं। लंदन के सर्वधर्म सम्मेलन में जैन धर्म को प्रतिनिधित्व मिलता है। जैन धर्म वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है।
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बच्चों में अवसाद बढ़ा रहा मोबाइल, कंप्यूटर
मुजफ्फरनगर। जैन मुनि बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। वह कहते हैं कि इंटरनेट का आवश्यक उपयोग करें। चेटिंग के चक्कर में न पड़े। प्रतिदिन रात्रि में दस बजे तक जरूर सो जाएं। बिलगेट्स नौ बजे सो जाते हैं। वाई-फाई से टेंशन बढती है। बच्चों को अधिक समय तक कार्टून और गेम न खेलने दें। फेसबुक पर अपना फोटो न लगाएं। 12 से 15 साल के बच्चे अधिक संख्या में अवसाद ग्रस्त हैं।
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