दूधली म्हाड़ी पर आस्था का सैलाब
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। अटूट श्रद्धा और विश्वास की प्रतीक दूधली म्हाड़ी पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। नीले घोड़े की जय, बागड़ वाले की जय के उद्घोष से पूरा इलाका गोगा की भक्ति मेें सराबोर था। गांव के चारों ओर से श्रद्धालुओं का सैलाब हाथ में निशान और छड़ी लेकर जयघोष करता हुआ म्हाड़ी दर्शन करने को आतुर था। कई प्रांतों के हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह ने सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक म्हाड़ी मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि दूधली म्हाड़ी का मेला लखी मेले के नाम से प्रख्यात हो गया है। कई प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं में भारतीय संस्कृति और परंपराओं का दर्शन होता है। इसके अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सैनी उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत की। प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के श्रद्धालुओं का तांता लगा। मन्नतें पूरी होने पर कोई पैदल, तो कोई लेटकर भक्तगण म्हाड़ी पर दर्शनों के लिए आतुर थे। बिरालसी से दूधली तक पांच किलोमीटर मार्ग पर वाहन, घोड़ा बुग्गी एवं ट्रैक्टर ट्रालियों की लंबी लाइन लगी रही। बाबा के दरबार में कोई आम हो या खास हर कोई बिना भेदभाव के दर्शन को पहुंच रहा था। विदित है कि राजस्थान के बाद दूधली की म्हाड़ी की मान्यता है। दोपहर बाद उमस भरी गर्मी भी भक्तों की आस्था नहीं डिगी। हर घर में उत्सव जैसा नजारा था। भाजपा नेता रामभूल सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष बबली शर्मा, पूर्व प्रधान सुभाष राणा, रणवीर सिंह, कृष्णपाल सिंह, बाबा रामभूल मौजूद रहे।
कई गुम बच्चों का होता रहा एलान
चरथावल। कई बच्चे मेले में गुम हुए, तो एक बच्चा परिजनों की आस में एसओ विंध्याचल तिवारी की गोद में ही सो गया। हर साल लाखों की तादात में श्रद्धालुओं का तांता लगता है। थाना प्रभारी एवं तमाम पुलिस चौकियों के स्टाफ केे अलावा जिले से भारी फोर्स बुलाया गया। पीएसी भी भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी थी। महिला कांस्टेबल और रिजर्व फोर्स ड्यूटी में तैनात रही।
युवा टीम ने संभाला व्यवस्था का जिम्मा
चरथावल। गांव की कमेटी के लोगों ने युवाओं की टोली भीड़ को संभालने में जुटी रही। दीपक, तरुण, अभिषेक, अतुल, शुभम, गोल्डी, दिवाकर, अंकित, रोशन, शक्ति , श्रीओम पुंडीर, विनोद राणा, भूपेंद्र सिंह, दीपक का सहयोग रहा। इस टीम ने श्रद्धालुओं की दिक्कतों को हल कराने में सहयोग किया। खोए-पाए बच्चों को उनके परिजनों ने मिलाने में पुलिस कंट्रोल रूम में संपर्क कराने में दिलचस्पी दिखाई।
कई लेटकर, तो कई दौड़ लगाकर पहुंचे म्हाड़ी
चरथावल। मन्नत पूरी होने पर कोई श्रद्धालु लेटकर निशान चढ़ाने पहुंचा, तो कोई दौड़ लगाते हुए पावन म्हाड़ी के दर्शनों को आतुर रहा। हरियाणा के पानीपत, करनाल और यमुनानगर से काफी श्रद्धालु म्हाढ़ी दर्शन को पहुंचे।मेले में बच्चों के लिए कई खिलौनों की आकृति में लगे रंग बिरंगे झूलों पर लुत्फ उठाया। इसके अलावा काला जादू, मिनी सर्कस, झूले और मौत के कुएं ने ग्रामीणों का भरपूर मनोरंजन किया।