हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है मकबरा
बुढ़ाना।
खेड़ामस्तान में पीर बाबा मस्तान शाह का मकबरा तत्कालीन कलक्टर आर मिल्टर व्हाइट ने 1928 में बनवाया था। पीर बाबा के मकबरे पर उनके भक्त चादर तथा प्रसाद चढ़ाकर खुशहाली के लिए मन्नतें मांगते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पीर बाबा अपने भक्तों की सभी मुरादें पूरी करते हैं।
तहसील क्षेत्र का गांव खेड़ामस्तान अपने नाम से प्रसिद्ध है। खेड़ामस्तान को अपनी पहचान बताने की कोई आवश्यकता नहीं है। अंग्रेजी शासन काल में खेड़ा मस्तान गांव का नाम भोगलखेड़ा था। बाद में भोगलखेड़ा से बदलकर खेड़ामस्तान हो गया। खेड़ामस्तान गांव की एक लंबी कहानी है। शाही मुगल खानदान के वंशज मस्तान शाह बचपन में वैरागी हो गए थे। शाही महल को छोड़कर उन्होंने एकांत में जाकर इबादत की। गांव खरड़ की जूड में इबादत करते हुए वे खेड़ामस्तान गांव में आ गए थे। उस समय खेड़ामस्तान गांव का नाम भोगलखेड़ा था। गांव के बहार निर्जन स्थान पर बडे़ झाड़ के पास उन्होंने अपनी इबादत की। मस्तान शाह की प्रसिद्धि पूरे क्षेत्र में फैल गई थी। वे आने वाले भक्तों की इच्छाओं को पूरी करने वाले थे। अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1928 में मुजफ्फरनगर के तत्कालीन कलक्टर आर मिल्टर व्हाइट अपने एक हिंदुस्तानी नौकर के साथ मस्तानशाह के पास पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा किअंग्रेज कलक्टर ने मस्तान शाह के सम्मान में सर नहीं झुकाया तो वे घोडे़ सहित जमीन पर गिर पडे़। अंग्रेज कलक्टर चरणों में जाकर गिरे थे। बाबा मस्तानशाह ने उन्हें माफ कर दिया था। वर्ष 1928 में ही बाबा मस्तानशाह ने अपने भक्तों के सामने अपना शरीर त्याग दिया था। इस दौरान तत्कालीन अंग्रेज कलक्टर भी वहां मौजूद थे। अंग्रेज कलक्टर ने उनकी याद में भोगलखेड़ा गांव में एक भव्य इमारत का निर्माण करवाया। इमारत में एक मस्जिद व पीर बाबा मस्तानशाह का मकबरा बनवाया। इमारत के मुख्य द्वार पर अंग्रेज कलक्टर द्वारा लगवाया गया पत्थर आज भी उनकी याद दिलाता है। इस इमारत में पहले तो जूनियर हाईस्कूल हुआ करता था। बाद में शिक्षा विभाग द्वारा अपनी इमारत बना लेने के बाद किराए पर ली गई। पीर बाबा मस्तानशाह की इमारत को खाली कर दिया था। देखरेख के अभाव में यह इमारत खंडहर का रूप ले चुकी है। मस्तान शाह के नाम पर अंग्रेज कलक्टर ने राजस्व के रिकार्ड में भोगलखेड़ा का नाम बदलकर पीर बाबा मस्तानशाह के नाम पर खेड़ामस्तान रख दिया था। आज भी खेडामस्तान गांव की पहचान पीर बाबा मस्तानशाह के नाम से होती है।
तीन दिवसीय मेले का आयोजन होगा
बुढ़ाना। पीर बाबा मस्तानशाह के मजार परिसर में प्रति वर्ष तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। इस मेले में दूरदराज से आने वाले भक्त उनके मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नते मांगते हैं। 9,10 व 11 सितंबर को उनके मजार परिसर में मेले का आयोजन होगा। उनके श्रद्धालु इस दौरान उनके मजार पर पहुंचकर धूपबत्ती प्रसाद व चादर चढ़ाकर मन्नते मांगेंगे।