चरथावल। फूल गोभी के दाम अर्श से फर्श पर आ जाने से उत्पादक मायूस हैं। खेत में कटाई और मंडी तक पहुंचाने की लागत भी नहीं मिलने से कई उत्पादक तो पशुओं के सामने गोभी को डालने पर मजबूर हो गए हैं।
चरथावल की फूलगोभी उत्तराखंड समेत कई जिलों में खुशबू बिखेरती है, लेकिन अचानक मंदी की मार के चलते उत्पादकों की नींद उड़ा दी है। 10 दिन पूर्व थोक मंडिय़ों में जो गोभी 10 रुपये किलो बिक रही थी, अब उन्हें दो रुपये किलो उठाने वाले ग्राहक ढूंढने पड़ रहे हैं। फिलहाल गोभी को ज्वालापुर और ऋषिकेश ले जाकर बेचना घाटे का सौदा हो गया है। अचानक दाम औंधे मुंह गिरने से गोभी उत्पादकों की मायूसी स्वाभाविक है। पांच हजार रुपये प्रति बीघा में लागत के सापेक्ष दो हजार का मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। मजदूर की मजदूरी और टोकरी समेत बारदानें की लागत भी हाथ नहीं लग रही है। पिंटू कश्यप बताते हैं कि बुधवार को मंडी में करीब 20 किलो की टोकरी सिर्फ 30 रुपये में बमुश्किल बिक पाई, जबकि उत्तराखंड की ज्वालापुर मंडी में दो रुपये किलो भाव मिला। जिससे उत्पादकों को भाड़ा जेब से देना पड़ा। किसान रोहताश कश्यप बताते हैं कि शादियों का सीजन खत्म होने के बाद अचानक आई मंदी ने तमाम बजट बिगाड़ दिया। एक पखवाड़े पूर्व 20 किलो गोभी की टोकरी मात्र 30-40 रुपये में आढ़त पर बिक रही है। गांव में लगने वाली साप्ताहिक पैंठ में उत्पादक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर बेचने के लिए ला रहे हैं। सुशील और अमरीश का कहना है कि किराया एवं बारदानें से भी कम मूल्य मिल रहा है। सब्जी आढ़ती मांगेराम कश्यप ने बताया कि इस बार कई सब्जी उत्पादक खड़ी गोभी दो महीने पूर्व 40 रुपये तक किलो थोक में बिकने वाली गोभी की मांग कम होने से रेट में भारी गिरावट आई है। उत्पादकों को भाड़ा भी पल्ले नहीं पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कई उत्पादक तो गोभी पशुओं के सामने डालने की नौबत आ गई है। उधर, फुटकर विक्रेता बाजार और गली मोहल्लों में आठ से 10 रुपये किलो बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।