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स्टेशनों पर कैमरे लगाना सही, किराए में छूट मिले

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रेल बजट में जिले को नहीं कोई सौगात
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मुजफ्फरनगर। केंद्र की मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण रेल बजट में कोई खास सौगात नहीं मिल पाई है, जबकि जनपदवासियों को डबल ट्रैक होने के कारण नई ट्रेन दौड़ने की उम्मीद थी, मगर यह आस अधूरी रह गई। हालांकि स्टेशनों पर सुविधा के लिए बजट तो रखा गया है, लेकिन क्या-क्या नए कार्य होंगे। इससे पर्दा नहीं हटाया जा सका।
बजट के दौरान केंद्र सरकार ने अपनी उपलब्धियों पर अधिक जोर दिया है। डेडीकेडेट फ्रंट कॉरिडोर के कार्य में तेजी लाने की हामी भरी गई है। जिले में तो कॉरिडोर के लिए भूमि का अधिग्रहण होने के बाद भी कार्य शुरू नहीं हो सका है। व्यापारियों, कारोबारियों के लिए माल ढुलाई के लिए विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की गई, लेकिन यह किस स्तर चालू होगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि जिले से बड़े पैमाने पर दिल्ली, नोएड़ा, अंबाला, पंजाब के साथ कई शहरों में कपड़ा, मावा, बर्तनों के अलावा अन्य सामग्री का निर्यात होता है। इसके लिए व्यापारी वर्ग पैसेंजर, एक्सप्रेस ट्रेनों के लगेज कोच पर निर्भर करते हैं। रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और वाईफाई आदि दिए जाना तो यात्री उचित ठहरा रहे हैं, लेकिन किराए के साथ अन्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की उम्मीद अधूरी रह गई।
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दैनिक यात्री धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि जनपद 2018 तक डबल ट्रैक हो जाएगा। ऐसे में यहां पर पैसेंजर के साथ एक्सप्रेस ट्रेनों के बढ़ने की उम्मीद थी। गाजियाबाद तक आने वाली ईएमयू को सहारनपुर तक किया जाना चाहिए था। इसके अलावा भी कई एक्सप्रेस यहां नहीं रुकती है, उनका स्टॉपेज मिलना चाहिए।
- छात्र गौरव सोम ने कहा कि वह गांधी पालीटेक्निक में पढ़ता है। रोजाना आना-जाना है। अधिकांश पैसेंजर ट्रेनों के कोच की हालत खराब है। किराया अधिक वसूला जा रहा है। प्लेटफार्म टिकट छात्रों के लिए मुफ्त होने चाहिए। स्टेशन पर भी कई सुविधाएं अधूरी पड़ी है। वित्त मंत्री का बजट कोई खास प्रभाव छोडऩे वाला नहीं है।
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लॉन टेनिस खिलाड़ी शालू ने कहा कि खिलाड़िय़ों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए राज्य और उससे बाहर जाना पड़ता है। ऑनलाइन और तत्काल टिकट पर अधिक चार्ज है। खिलाड़ियों के लिए ट्रेनों का सफर फ्री किया जाना चाहिए था, इस बजट से आस थी। बजट निराश करने वाला है। अखिल बालियान ने कहा कि इस बजट से भी लोगों, खिलाडिय़ों का निराशा मिली है। केंद्र सरकार से सहयोग की उम्मीदें बंधी थी, मगर उसके उलट हुआ। केंद्र सरकार को खिलाडिय़ों और विद्यार्थियों के हित में कदम उठाने चाहिए थे। जो इस बजट में नहीं दिख रहे हैं।
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