आचरण ही धर्म की कसौटी : आर्य
मुजफ्फरनगर। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि समाज में सत्य, न्याय और आचरण के लिए वैदिक संस्कृति अपनाएं। चरित्रहीन व्यक्ति कभी धार्मिक नहीं हो सकता। आचरण ही धर्म की कसौटी है। इस मौके पर उन्होंने वैदिक विभूतियों को सम्मानित किया।
गांधी कालोनी आर्य समाज में आयोजित वैदिक विभूति सम्मान समारोह में आचार्य ने कहा कि वेद ईश्वरीय वाणी हैं। वेदों में संसार के प्रत्येक व्यक्ति की आत्मोन्नति, सामाजिक उत्थान, शांति, सद्भाव, सदाचार, लौकिक सुख और परालौकिक आनंद का मार्ग दिखाया है। वेदानुकूल आचरण की कमी से समाज में अंधविश्वास, ढोंग, कुरीतियां और शोषण बढ़ रहा है। पाखंड और ढोंग के खिलाफ महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार आंदोलन को आगे बढ़ाएं। बेटे- बेटियों की चरित्र रक्षा से राष्ट्र में संस्कृति और संस्कारों की गरिमा बचेगी। चरित्रहीन व्यक्ति धार्मिक और उपासक नहीं हो सकता। स्वामी ब्रह्मानंद ने परिवारों में यज्ञ करने और महापुरुषों के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। स्वामी अंगिरस मुनि ने कहा कि देश को बचाने के लिए वैदिक शिक्षा का ज्ञानार्जन करना होगा। भजनोपदेशक कल्याण सिंह वेदी ने प्रेरक भजन सुनाए। समारोह में अमूल्य वैदिक सेवाओं के लिए स्वामी ब्रह्मानंद, अंगिरस मुनि और कल्याण वेदी को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अंगवस्त्र और सम्मान राशि भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम में गजेंद्र राणा, चंद्रवीर सिंह एडवोकेट, जयसिंह आर्य, इंद्रपाल सिंह, आनंद प्रकाश शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन संस्था मंत्री देवेंद्र राणा ने किया।