इलाज सस्ता, सजना-संवरना होगा महंगा
मुजफ्फरनगर। शुक्रवार आधी रात से एक देश एक कर प्रणाली लागू होने से कई वस्तुओं पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा तो कई में जनता को राहत के भी आसार हैं। इलाज कराना सस्ता होगा, जबकि साज-सज्जा और फूड सप्लीमेंट के उत्पाद महंगा होंगे। हालांकि कुछ दवाइयों पर 28 प्रतिशत की दर वाला जीएसटी लागू होगा, लेकिन ग्राहक और केमिस्ट पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
जीएसटी लागू होने से दवा बाजार भी असर पड़ेगा। दवाइयों के दामों में भी उतार-चढ़ाव होने की संभावनाएं हैं। हालांकि जीवन रक्षक दवाइयों के दाम नीचे गिर सकते हैं, क्योंकि कुछ दवाइयों पर वैट के हिसाब से 21 फीसदी टैक्स लगता था, जो जीएसटी के बाद 12 प्रतिशत तक होगा। ऐसे में इस स्लैब में आ रही दवाइयों के दाम डाउन होंगे। जिससे इलाज अधिक बोझ नहीं बनेगा। वहीं, उन दवाइयों के दाम ऊपर चढ़ सकते हैं, जिन पर 5 से 14.5 फीसदी की दर से टैक्स है। जीएसटी के बाद उन पर 28 फीसदी कर होगा।
इसमें फूड सप्लीमेंट और फेसवॉस, लाइट क्रीम, सेविंग क्रीम आदि के साथ कई अन्य दवाईयां शामिल हैं। हालांकि जीएसटी का असर से साज-सज्जा के लिए प्रयुक्त होने वाले उत्पादों पर आग बरसेगी। महिलाओं, पुरुषों के लिए प्रयोग होने वाले कॉस्मेटिक उत्पादों पर 28 फीसदी की दर से जीएसटी लागू होगा। ऐसे में ब्यूटी स्किन के पसंदीदा लोगों को चेहरा चमकाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी। यह वस्तुएं अपने सामान्य रेट से अधिक महंगी हो जाएंगी। इसके अलावा भी जिम में पसीना बहाने वाले लोगों भी बॉडी बनाने के लिए सप्लीमेंट लेने के लिए महंगाई की डोज लेनी पड़ेगी। उसके बाद ही बॉडी फिटनेस के लिए सप्लीमेंट खरीदे जा सकेंगे। इन प्रोडक्ट पर भी केंद्र सरकार ने 28 फीसदी वाले जीएसटी को रखा है। हालांकि अभी तक यह भी 12 से 14 फीसदी वाले टैक्स पर विक्रय थी।
उधर, जीएसटी का असर कुछ दवाइयों के मार्जन नहीं पड़ेगा। जिस कारण रिटेलर और थोक विक्रेता को लाभ रहेगा। अभी तक दवा बाजार से पांच फीसदी टैक्स की वसूली होती है। जबकि जीएसटी के बाद भी माला-डी, गर्भ निरोधक गोलियां शून्य टैक्स पर रहेंगी। मुजफ्फरनगर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र चौधरी ने बताया कि दवाइयों के बाजार में जीएसटी का अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। रिटेलर और थोक विक्रेता या ग्राहक की जेब पर कोई खास प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि कंपनियों को टैक्स चुकाना पड़ेगा। रिटेलर, थोक व्यापारी तो उसी एमआरपी पर दवाइयां बेचेगा, जो प्रिंट रेट रहेगा। वर्तमान में दवा व्यापारी पांच फीसदी टैक्स देता है, जबकि दवाइयां ऊपर से ही ऑल इंक्लूड टैक्स में शामिल होकर बाजार में आती हैं।