फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेहतर समाज, राष्ट्र निर्माण में शिक्षा अहम: बालकृष्णन

विज्ञापन
विज्ञापन
रोटी, कपड़ा और मकान देश के ज्वलंत मुद्दे
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज के सभागार में विधि विभाग द्वारा समकालीन परिप्रेक्ष्य में शासन के मुद्दे एवं नीतियां और कानून विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केजी बालकृष्णन रहे। उन्होंने कहा कि बेहतर समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा अहम है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस डॉ केजी बालकृष्णन ने कहा कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में सुशासन देना पहले भी चुनौती थी और आज भी चुनौती है। हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान में नीति निर्देशक तत्वों को इसीलिए रखा था, ताकि सरकार को यह पता रहे कि उन्हें किस दिशा में काम करना है। हालांकि तुलनात्मक रूप से पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत की स्थिति अच्छी है, फिर भी अमीरी और गरीबी के बीच की खाई का लगातार बढ़ते जाना सरकारों के समक्ष लगातार चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को उन लोगों की आवाज बनना चाहिए, जिनकी कोई आवाज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज और देश के निर्माण के लिए वहां के नागरिकों का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है।
विज्ञापन

विशिष्ट अतिथि ओडिसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश विनोद प्रसाद ने कहा कि हम उस देश के वासी हैं, जहां हर दस मील पर खान-पान, पहनावा एवं भाषा बदल जाती है। वर्तमान समय में रोटी, कपड़ा और मकान सबसे ज्वलंत मुद्दे हैं। तीन तलाक की समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो लोग इस समस्या को भुगत रहे हैं, उनको इंसाफ मिलना चाहिए। उन्होंने समस्या पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में नक्सलवाद देश के लिए नासूर बन चुका है। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट तैयार किया था, जिसकी वजह से नक्सलवाद में कमी आई थी। भारत के हर नागरिक को अपनी अपनी जिम्मेदारियों को निभाकर देश के विकास में अपना अभूतपूर्व योगदान देना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्तमान समय में चल रहे सबसे बडे़ धार्मिक मुद्दे राम मंदिर पर बोलते हुए कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है, जो धर्म एवं लोगों की आस्थाओं से जुड़ा हुआ है। सरकार को इस मुद्दे पर जल्द से जल्द नीति बनानी चाहिए।
रिटायर्ड लेफ्टिनेट जनरल एवं सुरक्षा विशेषज्ञ राज कादियान ने कहा कि आतंकवाद इस समय न केवल भारत अपितु संपूर्ण मानवता के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया है। इसका सबसे दुखद पहलु यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ अब तक आतंकवाद को परिभाषित तक नहीं कर पाया है। अमेरिका को भी भारत के दर्द का तब एहसास हुआ जब उस पर खुद आतंकी हमला हुआ। आतंकवाद मछली की तरह है और कश्मीर के स्थानीय लोग उसे पानी उपलब्ध करा रहें है। जिस दिन आतंकवाद को स्थानीय मदद मिलनी बंद हो जाएगी, उसी दिन आतंक का सफाया हो जाएगा। पाकिस्तान की नींव भारत से शत्रुता पर टिकी है।
उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई अंतिम विकल्प हैं, उससे पहले सरकार को कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाकर शत्रु देश को घुटनों पर लाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि भ्रष्टाचार भारत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. जो भी पक्ष सत्ता में आता है भ्रष्ट हो जाता है। अगर देश की संसद में ही भ्रष्टाचारी लोग बैठेंगे तो कैसे देश में एक अच्छी शासन प्रणाली का निर्माण हो पाएगा।
विज्ञापन

छोटूराम कॉलेज के प्राचार्या, डॉ नरेश मलिक ने कहा कि नीतियों को बनाते समय ऐसे लोगों को टीम में शामिल किया जाना चाहिए, जिनको समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी हो, तभी सरकार की नीतियां सफल हो पाएगी। कार्यक्रम के समापन पर शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ताओं को मुख्य अतिथि द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कॉलेज चेयरमैन डॉ एससी कुलश्रेष्ठ ने राष्ट्रीय सम्मेलन में आए अतिथियों एवं वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। श्रीराम कॉलेज अध्यक्ष एनजी मजूमदार, प्रमुख निदेशक डॉ आरएस चौहान, डॉ आदित्य गौतम, अभिषेक बागला, प्रेरणा मित्तल, मनोज धीमान, पूनम शर्मा, रविन्द्र प्रताप सिंह, प्रशान्त चौहान, डॉ पूनम शर्मा, संजीव कुमार, मोहित कुमार शर्मा, सोनिया गौड, परवीन, राखी ढिलौर, सबिया खान, आंचल अग्रवाल, मौहम्मद आमिर आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ प्रशांत चौहान ने किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें