प्रदेश सरकार के विद्युत व्यवस्था का निजीकरण करने के निर्णय का विद्युतकर्मी विरोध कर रहे है। कर्मचारियों और अधिकारियों ने दो से पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन किया। 27 मार्च पूरी तरह कार्य बहिष्कार की घोषणा की गई।
केंद्रीय संयुक्त संघर्ष समिति के निर्णय के बाद जिले के विद्युत कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर धरना दिया। चेतावनी दी कि सरकार के निर्णय के खिलाफ आंदोलन किसी भी हद तक जा सकता है। विद्युत कर्मियों की मांग है कि मेरठ, गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद शहरों में विद्युत व्यवस्था को निजी क्षेत्रों में बेचने की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। बिजली निगमों का एकीकरण कर राज्य विद्युत परिषद का पुनर्गठन किया जाए। पेंशन बहाली सहित विभिन्न मांगे रखी गई हैं। अधीक्षण अभियंता एके आत्रेय ने कहा कि 27 से पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। निजीकरण से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। एसई दीपक अग्रवाल, एक्सईएन अवनीश कुमार, सोमदत्त शर्मा, कर्म सिंह, विजय मोहन खेड़ा, सुशील कुमार, चतर सिंह, नरेंद्र सिंह, संजय यादव, रामदयाल, सुनील त्यागी, आशु माहेश्वरी, अभिनव गोयल, आशीष शर्मा, अनिल शर्मा, राकेश कुमार, गौरव, जगरोशनलाल आदि ने विचार रखे। शाखा के जिलाध्यक्ष रामनिवास त्यागी, यूसी शर्मा ने आंदोलन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।