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नदी किनारे गांवों का पानी हुआ जहरीला

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मुजफ्फरनगर। सहारनपुर से लेकर मेरठ मंडल तक 316 इंडस्ट्रियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच के रडार पर रखा है। इन इंडस्ट्रियों से दूषित जल काली, हिंडन नदी के साथ कृष्णा नदी में छोड़ा जा रहा है। अब तक की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनमें क्षेत्रवार आबादी का बड़ा हिस्सा प्रभावित मिला है। नदियों के दो से चार किलोमीटर की रेंज में बसे गांवों में भूजल, भूगर्भ की हालत अधिक खराब है। यहां पीने लायक पानी नहीं बचा है। एनजीटी ने समस्त रिकार्ड के साथ वर्तमान हालत पर रिपोर्ट अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
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बढ़ते जल और वायु प्रदूषण को लेकर एनजीटी सख्त है। बीते साल स्मॉग और प्रदूषण के असर से एनसीआर की रफ्तार थम गई थी। इस पर एनजीटी ने कड़ी आपत्ति जताई। वहीं, जल प्रदूषण को लेकर स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है। इससे चिंतित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सरकारों को चेताया है। प्रदूषण की असल जड़ जानने और इससे बिगड़े हालातों की समीक्षा के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेरठ और सहारनपुर मंडल में जांच शुरू कराई है। मुख्य रूप से गांवों में भूगर्भ की हालत अत्यधिक खराब हो रही है। सहारनपुर मंडल में काली, हिंडन और कृष्णा नदी मुख्य हैं। इनके आसपास बसे गांवों में हालात चिंताजनक हो चुके हैं। इसके पीछे औद्योगिक इकाईयों के दूषित जल को नदियों में प्रवाहित करना माना गया है। इसके लिए ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी की संयुक्त टीम जांच कर रही है। जनपद से गुजर रही काली ईस्ट और वेस्ट, हिंडन में केमिकलयुक्त पानी बह रहा है। इसके असर से नदियों के किनारे और करीब चार किलोमीटर दूरी पर बसे गांवों में हालात अधिक दयनीय हैं। गांवों के नलों से पानी के स्थान पर जहरीला पीला पानी आ रहा है। यहां भूगर्भ में गर्माहट बढ़ने के कारण फसलों पर असर पड़ रहा है। सब्जियों तक में भी विषैलापन पैदा होने लगा है। इन प्रभावित क्षेत्रों, गांवों का पूर्ण रिकार्ड एनजीटी ने तलब किया है। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। सहारनपुर, मेरठ मंडल की करीब 316 इंडस्ट्रियों पर जांच का साया मंडरा रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक डॉ डीसी पांडे ने बताया कि अभी जांच-पड़ताल चल रही है। प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट एनजीटी ने मांगी है। यहां कितने गांव प्रभावित हैं और उनके हालात किस तरह हैं, इसकी पूरी रिपोर्ट भेजी जा रही है।
हैंडपंप के लिए जल निगम जिम्मेदार
मुजफ्फरनगर। प्रभावित क्षेत्रों में नलकूप उखाड़कर लगाने की जिम्मेदारी जल निगम के कंधों पर है। एनजीटी को रिपोर्ट भेजने के लिए जो तथ्य रखे गए हैं। उसमें हैंडपंप बदलने के लिए जल निगम का काम बताया गया है। हालांकि यहां प्रभावित गांवों में कितने हैंडपंप बदले गए हैं और आगे क्या कार्रवाई रहेगी, यह सब जल निगम के हिस्से में रखा गया है।
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काली नदी से 200 गांव होंगे प्रभावित
मुजफ्फरनगर। काली नदी से करीब 200 गांवों में पानी पीने लायक नहीं है। जनपद में डबल, कितास, मोरकुक्का, जीवना, पुरबालियान, बोपाड़ा, रतनपुरी, समौली, घनश्यामपुरा, चंदसीना, रामपुर, इंचौड़ा, मंडावली बांगर, खादर, नंगला, भनवाड़ा, बेगराजपुर, वहलना आदि गांवों में बीमारियों का प्रकोप अधिक है।
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