जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने दिया ज्ञापन
मुजफ्फरनगर। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से न्यायालय में जाट आरक्षण के लिए पैरवी करने की मांग की। इस संबंध में एडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी दिया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि 1993 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद से जाटों के आरक्षण की मांग की जाती रही। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के बाद उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल, मध्यप्रदेश में भी जाट आरक्षण की श्रेणी में आए। 2001 में बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्त ने जाट समाज को ओबीसी में शामिल किया। समाज तब से आरक्षण का लाभ ले रहा है। प्रदेश सरकार सही पक्ष रखकर जाट आरक्षण को यथावत रखवाने का काम करे। ब्रहमपाल सिंह बालियान, प्रमोद अहलावत, मनोज कुमार, रामफल सिंह पंवार, हरेंद्र, बालेंद्र सिंह, सतेंद्र सिंह, ब्रजपाल, ईश्वर मलिक, राजन, मनोज कुमार, सुशील मलिक आदि रहे।