मुजफ्फरनगर। किसान की बेटी ने संस्कृत की साधना कर कामयाबी को छू लिया है। छोटी उम्र में अर्चना गुरुकुल की छात्रा बनी और फिर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एमए संस्कृत में स्वर्ण पदक हासिल कर अपने गांव मेघाखेड़ी का गौरव बढ़ा दिया। संस्कृत भाषा पर निपुणता के दम पर पहले ही प्रयास में नेट जेआरएफ क्वालीफाई कर लिया।
सदर ब्लाक के गांव मेघाखेड़ी में किसान विलेश कुमार और सुकेशा देवी की बेटी अर्चना शास्त्री ने संस्कृत विषय में सफलता की नई दास्तां लिखी है। दस साल की उम्र में बाबा महाश्य वेगवंत आर्य ने उसे दिल्ली के गुरुकुल नरेला में प्रवेश दिलाया। यहां तीन साल की पढ़ाई के बाद वह नजीबाबाद के गुरुकुल आर्ष कन्या विद्यापीठ की विद्यार्थी बनी। अधिष्ठात्री डॉ प्रियंवदा वेद भारती के मार्गदर्शन में बीए उत्तीर्ण कर शास्त्री उपाधि प्राप्त की। संस्कृत में बसे मन ने उसे प्रेेरित किए रखा। शहर के एसडी डिग्री कॉलेज से वर्ष 2014 में एमए संस्कृत में 89 प्रतिशत अंक पाए और चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ की टॉपर बनी। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रामनाइक ने उसे सम्मानित किया। उसकी लगन और मेहनत सफलता की राह बनाती रही। एसडी कॉलेज इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ जय कुमार जैन और संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ विजय लक्ष्मी के निर्देशन में अर्चना ने पहले प्रयास में ही नेट जेआरएफ की परीक्षा पास की। ताऊ रविंद्र आर्य, चाचा नरेश और महक सिंह आर्य ने बेटियों को सदैव संस्कृत विषय में शिक्षा ग्रहण करने को अहमियत दी। दो बहनों जिज्ञाशा और दीपा आर्या ने गुरुकुल में संस्कृत की शिक्षा पाई है।
संस्कृत विषय से मिला कॅरियर
मुजफ्फरनगर। संस्कृत विषय में बेटियां उत्कृष्ट कॅरियर हासिल कर सकती है। अर्चना शास्त्री ने दिल्ली सरकार की टीजीटी परीक्षा क्वालीफाई की। वह बताती है कि कॉलेज में संस्कृत असिस्टेंट प्रोफेसर बनना उनका लक्ष्य है। महाकवि कालीदास एवं बाणभट्ट के काव्यों को पढ़ने से उनकी संस्कृत में रुचि बढ़ी।