मुजफ्फरनगर। मिठाईयों में नकली मावा, दूध में पाउडर समेत हानिकारक रंगों से खाद्य उत्पाद बनाने वाले मिलावटखोरों पर बड़े पैमाने पर जुर्माना लगाया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने नौ माह के भीतर मिलावटखोरों से 28 लाख रुपये से अधिक जुर्माना वसूला है। इनमें सबसे ज्यादा मामले मावे की मिठाईयों, दूध के सामने आए हैं।
एक अप्रैल से नवंबर माह तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने शहर से लेकर देहात में विभिन्न पदार्थों की जांच कर 201 सैंपल लखनऊ प्रयोगशाला भेजे। इनमें कई नामी ब्रांड की मिठाईयां, दूध के साथ लड्डू, रसगुल्ला, बर्फी, काजू कतली के अलावा मीठी सुपारी तक शामिल है। विभाग ने यह नमूने बुढ़ाना, खतौली, पुरकाजी, जानसठ, मीरापुर, शहर की कई प्रसिद्ध कालोनियों से भरकर भेजे थे। प्रयोगशाला भेजे गए नमूनों की जांच कर वैज्ञानिकों ने दूध का दूध और पानी का पानी किया है। वैज्ञानिकों ने 201 में से 103 प्रोडक्ट मानक की कसौटी पर खरे नहीं पाए हैं। जिनमें मावा, दूध के साथ नमकीन के उत्पाद हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर 103 मामलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एडीएम-ई की कोर्ट में वाद दायर किया, जिसकी सुनवाई होने के बाद मिलावटखोरों पर जुर्माना लगाया गया। नौ महीने के अंदर विभाग ने मिलावटखोरों से 28 लाख पांच हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है। इसके अलावा भी दर्जनभर मिठाई विक्रेताओं और नमकीन वालों के विरुद्ध कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई है। अभिहित अधिकारी विनीत कुमार ने बताया कि मिलावटखोरों पर शिकंजा कसा गया है। विभाग ने कार्रवाई नौ माह में 28 लाख रुपए जुर्माना वसूल किया है। दर्जनभर केस अभी कोर्ट लंबित है, जिनके विरुद्ध निर्णय आते ही कार्रवाई की जाएगी।
मावा की भट्टियों पर कड़ी नजर
मुजफ्फरनगर। विभाग की मावा भट्ठियों पर कड़ी नजर है। कई गांव इसकी रडार पर हैं, जहां सिंथेटिक दूध के साथ मिलावट का मावा तैयार हो रहा है। इनको विभाग ट्रेस करने में लगा है। यह गांव संवेदनशील श्रेणी में है, जहां टीम अकेले छापामारी करने से बच रही है।