मुजफ्फरनगर। जिला महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग करंट के फेर में फंस गई है। अस्पताल में विद्युत आपूर्ति के लिए बड़े ताम-झाम की जरुरत है। विद्युत कनेक्शन के लिए विभाग को 65 लाख रुपए चाहिए। जबकि शासन स्तर से 20 मुहैया कराए जा रहे हैं। ऐसे में बाकी 45 लाख रुपए का इंतजाम करने में विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। जिसके चलते बिल्डिंग रौशन होने से महरुम हो गई है।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय परिसर में ही महिला जिला चिकित्सालय संचालित है। पुराने अस्पताल में मरीजों का ओवरलोड़ बढऩे से जगह कम पड़ गई। इस पर तत्कालीन प्रदेश सरकार ने परिसर में नई 100 बिल्डिंग के निर्माण को हरी झंडी दी। करोड़ो रुपए खर्च तीन मंजिला चमचमाती बिल्डिंग तैयार हो गई है। मगर, बिल्डिंग में अंधेरा नहीं छंट सका है। अस्पताल में विद्युत आपूर्ति के लिए बड़े ताम-झाम की जरुरत है। रोशनी से जगमग करने के लिए अस्पताल में विद्युत आपूर्ति के लिए करीब 65 लाख रुपए का खर्च आएगा। जिसके बल पर आपूर्ति सुचारु होगी। हालांकि प्रदेश सरकार विद्युत कनेक्शन के लिए 20 लाख रुपए की ग्रांट दे रही है, मगर बाकी 45 लाख रुपए पर चुप्पी साध ली गई है। ऐसे में विभाग भी हैरान है कि इतनी बड़ी रकम कहां लाई जाएगी। विद्युत लगाए जाने की बाबत स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेजा है। जिसके माध्यम से विद्युत आपूर्ति के लिए कनेक्शन लगाए जाने की मांग रखी है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय की बिल्डिंग में कार्य चल रहा है। बिल्डिंग में 90 फीसदी से अधिक काम पूरा हो गया है। जल्द ही विद्युत कनेक्शन लगने के बाद अस्पताल को सुचारु कराया जाएगा।
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दो ट्रांसफार्मर और लाइन बिछेगी
मुजफ्फरनगर। अस्पताल की बिल्डिंग में विद्युत का लोड उठाने के लिए दो ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। जिनके माध्यम से विद्युत आपूर्ति सुचारु होगी। इसके अलावा भी अस्पताल में लाइन बिछाने के साथ विद्युत विभाग से इसके लिए अनुमोदन लेना पडेगा। एक साल से स्वास्थ्य विभाग विद्युत कनेक्शन के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
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ट्यूबवेल के लिए भी पत्र भेजा
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग में वर्तमान में जो ट्यूबवेल लगी है, वह ओवरलोड के लिहाज से कम क्षमता की है। ऐसे में नया महिला चिकित्सालय तैयार होने पर पानी की अधित खपत बढ़ेगी। जिसके चलते एक ट्यूबवेल कारगर नहीं है। ओवरलोड को कम करने तथा चौबीस घंटे पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्धता के लिए निर्माण ईकाई विभाग ने शासन को पत्र भेजा है।