सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों पर स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। दोनों मशीनों की सेंटरों की कुंडली खंगाली जा रही है। सूची तैयार करने के बाद अधिकारी इन्हें नोटिस जारी करेंगे। जिसके माध्यम से लाइसेंस और वैधता की जांच की जाएगी। अवैध सेंटरों पर विभाग ने शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।
जिले की पीसीपीएनडीटी कमेटी ने पहली मीटिंग में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों को भी इसी एक्ट के तहत लाइसेंस दिए जाने का प्रस्ताव रखा था। जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने हरी झंडी दे दी है। जिसके चलते जिले में चल रही सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों को पीसीपीएनडीटी एक्ट में शामिल किया गया है। क्योंकि इन मशीनों पर भी रेडियोलॉजिस्ट ही कार्य करते हैं। सीटी स्कैन और एमआरआई भी एक प्रकार से भीतरी शरीर का अल्ट्रासाउंड जैसा माना गया है। अभी तक इनके लाइसेंस चिकित्सकीय नियमों के तहत जारी होते थे, जो अब नहीं हो सकेंगे। विभाग एक-एक मशीन का ब्यौरा सुरक्षित रखेगा। इसके लिए सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की कुंडली खंगाली जा रही है। विभागीय अधिकारी इन सेंटरों की सूची बना रहे है। जिन्हें नोटिस भेजकर लाइसेंस के साथ कार्य करने वाले कर्मचारी के बारे जमें जानकारी ली जाएगी। अवैध रुप से चल रही मशीनों को बंद कर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नोडल अधिकारी डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की सूची बनाई जा रही है। सूची तैयार होने के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सेंटर संचालकों में खलबली
मुजफ्फरनगर। नए नियमों को लेकर सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों के संचालकों में खलबली मच गई है। चूंकि मशीन संचालकों को माहवार मरीजों का रिकार्ड समेत कार्रवाई का ब्यौरा देना होगा। इससे बचने के लिए सेंटर संचालकों अपने जुगाड़ भिड़ाने शुरू कर दिए हैं।