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आौदी के बाद से नहीं बना पिछड़ा, मुस्लिम चेयरमैन

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सपा-बसपा का कभी नहीं खुला शहर में खाता
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मुजफ्फरनगर। आजादी के बाद से नगर पालिका परिषद में मुस्लिम और पिछड़ा चेयरमैन का चुनाव नहीं जीत पाया। उपाध्यक्ष के रहते तीन बार मुस्लिम को कुर्सी पर बैठने का मौका मिला, वह भी कुछ महीनों के लिए। पालिका में खास बात यह रही कि बसपा और सपा प्रत्याशी यहां आज तक नहीं जीत पाए। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी ही यहां चुनाव जीतते रहे हैं।
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नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के सीधे चुनाव में मुस्लिम और पिछड़ा आज तक नहीं जीत पाया है। चेयरमैन की कुर्सी पर अधिकतम कब्जा वैश्य समाज का ही रहा है। ब्राह्मण यहां केवल एक बार सुभाष शर्मा और पंजाबी दो बार चुन्नीलाल अनेजा और जगदीश भाटिया चुनाव जीत पाए हैं। मुस्लिम को यहां तीन बार उपाध्यक्ष रहते हुए कार्यभार मिला। इसमें रफीक अहमद को एक जून 1947 से 13 जून 1947 तक 13 दिन का कार्यकाल मिला। इसके बाद दोबारा रफीक अहमद को ही 30 अप्रैल 1960 से दो जून 1960 तक कुर्सी मिली। इसके बाद मोहम्मद मजहर को 12 जनवरी 1973 से 23 फरवरी 1973 तक कुर्सी मिली। कुल मिलाकर मुस्लिम चेयरमैनों के पास केवल 90 दिन तक ही कुर्सी रह पाई। चुनाव में यहां कांग्रेस के चेयरमैन सबसे अधिक बार जीते। बीजेपी 1995 के बाद से जीती। तीन बार यहां बीजेपी को मौका मिला। कांग्रेस 1995 तक लगातार जीतती रही। इसके बाद 2012 में कांग्रेस के पंकज अग्रवाल जीते। सपा और बसपा को आज तक पालिका अध्यक्ष की कुर्सी यहां नसीब नहीं हो पाई है।
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- कपिल कुमार
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