गुरुकुल कालवा हरियाणा के अधिष्ठाता आचार्य राजेंद्र ने कहा कि वेदों की शरण में आए बिना धर्म का ज्ञान नहीं होगा। वैदिक संस्कृति मन को शुद्ध कर प्राणीमात्र को सत्य, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाती है।
वैदिक साधना संस्कृत विद्या आश्रम गुरुकुल में आयोजित वैदिक सत्संग और यज्ञ समारोह में आचार्य राजेंद्र ने कहा कि वेद सृष्टि का आधार है। वेदों से विश्व को सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति हुईं है। जिन देशों ने वेदों को छोड़ा, वहां आतंक, अशांति, हिंसा औऱ अमानवीय घटनाएं बढ़ी है। धर्म क्या है, यह सत्य वेदों से ही मिलता है। मन की पवित्रता के साथ मानवीय शुभ कर्म करें। वेदों की शरण में आकर ही धार्मिक ज्ञान को जान पाएंगे। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि संस्कार जीवन को सात्विक, निर्भय और चरित्रवान बनाते है। आचरण सुधरेगा, तभी जग सुधरेगा। समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए महर्षि दयानंद के मूल सिद्धांतों, उद्देश्यों को गांव-गांव फैलाएं ।वेदों की उपेक्षा से पाखंड, ढोंग, अंधविश्वास बढ़ा है। युवा सत्यार्थ प्रकाश पढ़े, जीवन बदल जाएगा। आचार्य दयादेव ने कहा कि वैदिक संस्कृति को अपनाकर जीवन को सुखद, निर्मल और देशभक्त बनाए। वेदों में मानवमात्र के कल्याण की बात निहित है। गुरुकुल भारतीय संस्कृति के केंद्र है। शिक्षा के साथ बच्चों को नैतिक मूल्यों का बोध कराएं। स्वामी ब्रह्मानंद ने कहा कि सामाजिक उत्थान के लिए ऋषि के पथ पर चलना होगा। भजनोपदेशक कृष्ण दत्त ने भजनों के माध्यम समाज सुधार की प्रेरणा जाग्रत की। समारोह में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अंगवस्त्र, सम्मान राशि भेंट कर आचार्य राजेंद्र का अभिनंदन किया। इस मौके पर नरेंद्र रायल, अखिलेश, ब्रह्मचारी सुरेंद्र, अमित, घनश्याम, गोपाल स्वरूप, गजेंद्र राणा, गजेंद्र सिंघल आदि मौजूद रहे। यज्ञमान गोपाल गोयल, नरेंद्र चौधरी, अखिलेश अग्रवाल सपत्नीक रहे।