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दल बदलुओं को वोटरों ने नकारा

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दल बदलुओं को वोटरों ने नकारा
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मुजफ्फरनगर।
निकाय चुनाव में मतदाताओं ने दल बदलुओं को नकार दिया है। बसपा से भाजपा में आए अरविंद राज शर्मा की पत्नी सुधाराज शर्मा भाजपा के टिकट पर चेयरमैन पद का चुनाव लड़ी, मगर जीत नहीं पाई। सपा प्रत्याशी पूर्व विधायक मिथलेश पाल के लिए रालोद छोड़ कर सपा का दामन थामना फायदेमंद नहीं रहा।
दल बदल कर नई पार्टियों में आए प्रत्याशियों को मतदाताओं ने पसंद नहीं किया। शहर सीट पर वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर एमएलए का चुनाव लड़े अरविंद राज शर्मा ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में ऐंट्री की थी। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने उनकी पत्नी सुधाराज शर्मा को प्रत्याशी बनाया था, मगर उन्हें मतदाताओं ने नकार दिया। पूर्व विधायक मिथलेश पाल के लिए भी रालोद छोड़ कर सपा में आना घाटे का सौदा साबित हुआ। मोरना से रालोद की विधायक रही मिथलेश को छोटे चौधरी ने वर्ष 2016 के उप चुनाव में शहरी सीट से और वर्ष 2017 में मीरापुर विधानसभा सीट से पार्टी से चुनाव लडवाया था। वह रालोद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष भी रही। निकाय चुनाव से ठीक पहले अति पिछड़ा और मुस्लिम समीकरण के सहारे चुनाव जीतने की सपा की रणनीति में उन्हें सपा ने सदस्यता ग्रहण करा कर प्रत्याशी बनाया। सपा के वोट बैंक मुस्लिम मतदाताओं ने ही उन्हें तवज्जों ने दी। कांग्रेस, बीजेपी के बाद वह तीसरे स्थान पर रही। मिथलेश को कुल 14514 मत मिले।
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शबनम को भी मिल गए 581 मत
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कदम पीछे खींचने के बावजूद रालोद प्रत्याशी शबनम परवीन को 581 मत मिल गए। पूर्व सभासद डॉ मुर्तजा सलमानी की पुत्रवधू शबनम परवीन को चार राउंट में क्रमश:145, 134, 163 और 139 मत मिले। रालोद प्रत्याशी ने पार्टी नेताओं के रुख से असमंजस में रही। रालोद ने कांग्रेस प्रत्याशी अंजू अग्रवाल के पक्ष में चुनाव से हटने की घोषणा की, मगर रालोद प्रत्याशी ने पार्टी की बात नकार दी। बाद में पूर्व सभासद सलमानी ने बसपा प्रत्याशी मुदस्सिर रहमान को समर्थन देने का एलान किया था। हालांकि यह कदम बसपा के काम नहीं आया।
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