मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि के तहत मेडिकल स्टोर खोलने की योजना से जिला इत्तेफाक नहीं रखता है। योजना में मेडिकल स्टोर खोलने के लिए छह आवेदन औषधि निरीक्षक विभाग में आए हैं। योजना का सही रूप से प्रचार-प्रसार न होने से दम तोड़ती दिख रही है। वहीं, पहले चरण में कम से कम 60 केंद्र खोले जाने का दावा किया था, लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो दस प्रतिशत भी सफलता मिलना मुश्किल है।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत जिलों में लोगों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए केंद्र खोले जाएंगे। इन पर जेनरिक दवाईयों का विक्रय होगा। इसके लिए जून माह तक शहर में सदर क्षेत्र समेत जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में पहले चरण में कम से कम 60 जन औषधि केंद्र खोले जाने थे, लेकिन योजना जनपद में लटकती दिख रही है। क्योंकि इन केंद्रों पर बाजार के मूल्य से कम रेट पर दवाईयों का विक्रय किया जाएगा। केंद्र सरकार ने स्टोर खोलने वाले को सब्सिडी के साथ-साथ 20 प्रतिशत मार्जिन भी देने भी योजना बनाई है। योजना का प्रचार-प्रसार सही न होने के कारण कारोबारी अनभिज्ञ है। इसके चलते आवेदन की प्रक्रिया सुस्त पड़ गई है। जिले में हजार से अधिक दवाईयों के रिटेलर और होलसेल में लाइसेंस जारी है, मगर इस योजना में अभी तक छह लोगों ने आवेदन किया है, जिसके चलते लोगों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध होने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है।
ड्रग इंस्पेक्टर जगबीर सिंह ने बताया कि योजना के कम ही आवेदन आए हैं, जो भी आएं है, उनकी जांच पड़ताल करने के बाद लाइसेंस प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं, परियोजना की जिला प्रमुख ज्योति राठी ने बताया कि जन औषधि योजना में अभी तक उनके बाद 32 लोगों के फार्म आए हैं, जिन्हें लाइसेंस के लिए डीआई के पास भेजा जाएगा। लाइसेंस बनने के बाद केंद्र खोले जाने की योजना आगे बढ़ेगी।
दवा कारोबारियों में संशय बना
मुजफ्फरनगर। दवा कारोबारियों के साथ अन्य लोगों के आवेदन न करने के पीछे कई कारण है। प्रक्रिया जटिल होने के साथ ही मुख्य परेशानी यह है कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना में केवल जेनरिक दवाईयां ही स्टोर संचालक बेचेगा। वह दूसरी दवाइयां नहीं विक्रय करेगा। हालांकि अभी तक ड्रग लाइसेंस लेने के बाद मेडिकल स्टोर पर होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक के साथ अन्य कई साल्ट को बेचता हैं। ऐसे में स्टोर संचालकों को रोजाना अच्छी इनकम होती है, लेकिन जेनरिक दवाइयों पर उतनी नहीं मानी जा रही है।