सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं फरहा फैज, कहा: रजिस्ट्रेशन रद्द कराने को जल्द फाइल करेंगी पीआईएल
अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद (सहारनपुर)। ट्रिपल तलाक का दंश झेल रहीं मुस्लिम महिलाओं की लड़ाई लड़ने वाली सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता फरहा फैज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगी। फरहा फैज का कहना है कि वह बोर्ड का रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए जल्द ही उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने जा रही हैं।
शुक्रवार को अमर उजाला से बात करते हुए फरहा फैज ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए वह जल्द ही उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करेंगी इसके लिए वह पूरी तैयारी करने में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी एनजीओ हो वो एनजीओ के दायरे में काम करे बात समझ में आती है, लेकिन एनजीओ के दायरे से बाहर निकलकर उस तरह के काम करे जिससे लोग भटक जाएं यह गलत बात है। क्या सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद बोर्ड का रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है?। इस सवाल के जवाब में उन्होंने दुष्यंत कुमार का शेर सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरा मकसद है कि सूरत बदलनी चाहिए सुनाते हुए कहा कि उससे पहले यह सुधार ले आते हैं तो ठीक नहीं तो इनको नोटिस जारी होंगे तो कम से कम यह सुप्रीम कोर्ट में बताएंगे कि इस तरह के कारनामों को क्यों अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड खुलेआम कह रहा है कि हम हर जिले में शरई अदालत चलाएंगे, जबकि समाज का बड़ा वर्ग ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। उनको शरई अदालत जब कुछ कहेंगी तो किसकी हिम्मत है कि वो इस अदालत के फैसले के खिलाफ चला जाए और इस अदालत की कहीं सुनवाई भी नहीं है। फरहा फैज ने कहा कि मान लीजिए निचली अदालत कोई फैसला देती है तो उसके खिलाफ हाईकोर्ट जाता है और वहां से सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचता है। जबकि इनकी शरई अदालतों की कोई अपील ही नहीं है। दूसरी बात यह है कि इन्होंने फैमिली एक्ट ड्राफ्ट कर लिया। इसका इन्हें कोई अधिकार ही नहीं है। एक एनजीओ कैसे कोई एक्ट ड्राफ्ट कर सकती है और अपनी अदालतों में उस पर अमल करा रहे हैं। इसलिए उन्होंने मन बनाया है कि वह बोर्ड का रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल करेंगी।