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सीबीनॉट मशीन बता देती है 2 घंटे टीबी रोग

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मुजफ्फरनगर।
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ट्यूबरक्लोसिस बैक्टरिया (टीबी) लाइलाज नहीं है। इसकी समय पर देखभाल और उपचार से बचाव संभव है। टीबी जितनी पुरानी होगी, उतना ही घातक रुप लेगी। हालांकि जिले में लगी सीबीनॉट मशीन दो घंटे में जांच कर टीबी की श्रेणी बता देती है। उसके आधार पर ही रोगियों का उपचार किया जा रहा है।
शासन से स्वास्थ्य विभाग को सीबीनॉट मशीन मिली है। एक मशीन जिला क्षय रोग केंद्र तथा दूसरी बघरा स्वास्थ्य केंद्र पर लगी है। मशीन के माध्यम से रोगियों में टीबी की स्टेज का पता लगाया जा रहा है। विशेष यह है कि सीबीनॉट में एक साथ बलगम के सैंपल रखे जाते हैं, इससे चार लोगों में बीमारी का पता चल सकता है। पहले एक ही सैंपल की जांच में वक्त लगता था। बलगम की जांच होने पर बैक्टरिया का पता लग जाता है। रिफार्मप्सिन से बैक्टरिया के नॉर्मल और मल्टी ड्रग रेजिमेंट (एमडीआर) होने का पता चलता है। जांच में एमडीआर बैक्टरिया है आया तो उपचार दो साल तक होगा, जबकि अन्य का छह से आठ तक इलाज किया जाएगा। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि टीबी रोग पर काबू पाने के लिए जगह-जगह जागरुकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके लिए लोगों को सचेत कर मामूली लक्षण दिखने पर जांच कराने को प्रेरित किया जाएगा।
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300 सैंपल का रोजाना कलेक्शन
जिले में 27 माइक्रोस्कोपी सेंटर है। जहां टीबी की जांच होती है। इन पर रोजाना करीब 300 संभावित टीबी के सैंपलों का कलेक्शन होता है। जिनकी जांच-पड़ताल के बाद रोग की स्थिति साफ होती है। कीटाणु पॉजिटिव आने पर तत्काल रोगी को स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी में लेता है। उसके बाद रोजाना उसको खुराक खिलाई जाती है।

बीडाकूलीन घटाएगी इलाज का समय
स्वास्थ्य विभाग एमडीआर बैक्टरिया वाले रोगियों का इलाज दो साल तक रकती है। जिसमें उन्हें कई तरह की खुराक दी जाती है। हालांकि विभाग में बीडाकूलीन दवा तैयार की जा रही है। बीडाकूलीन दवाई उपचार का समय एक साल करेगी, ताकि मरीज का जल्द बीमारी से पीछा छुड़ाया जा सके।
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आठ लोग लखनऊ बुलाए गए
शनिवार को लखनऊ में होने वाले वल्र्ड टीबी डे कार्यक्रम के लिए प्रत्येक जिलों से क्षय रोग विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को बुलाया गया है। जिसके चलते यहां से भी विपिन कुमार, सतीश कुमार, सहबान उलहक, अमित तोमर, सतेंद्र कुमार, सलित कुमार, विजय कुमार, जितेंद्र राजपूत आदि लखनऊ भेजे गए हैं।
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