स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट पीपीपी मॉडल पर चलेगी। यह यूनिट वाराणसी की एक कंपनी लगाएगी। विभाग ने यूनिट के लिए बिल्डिंग तैयार कर दी है। इसके संचालन का पूरा खाका भी खींचा जा चुका है। जनवरी के मध्यम तक यहां लोगों का मुहैया कराया जाएगा। इसको लेकर अधिकारियों ने पूरी कार्ययोजना बना ली है।
अभी तक जिले के साथ शामली के लोगों को डायलिसिस के लिए मेरठ, गाजियाबाद या दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ी है। जनपद की मेरठ तक दूरी 65 किलोमीटर है, जबकि गाजियाबाद-दिल्ली इससे दोगुना पड़ता है। ऐसे में कई बार मरीज की हालत भी गंभीर हो जाती है। इससे बचने के लिए स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट लगाए जाने की योजना तैयार की गई। तत्कालीन सपा सरकार ने योजना का प्रपोजल मांगने के साथ स्वास्थ्य विभाग से जगह मांगी थी। इस पर विभाग ने बंद पड़ी बर्न यूनिट में डायलिसिस का प्रस्ताव भेजा था। करीब एक साल से योजना पर युद्धस्तर पर कार्य चल रहा है। अब जाकर योजना पूरी होती दिखाई दे रही है। यूनिट को वाराणसी की एक कंपनी लगाएगी, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर चलेगी। जनवरी के मध्य तक योजना के अस्तित्व में आने की संभावनाएं हैं। एमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि डायलिसिस यूनिट लगाने के लिए कार्य 90 फीसदी पूण्र कर लिया गया है। यूनिट लगाने के लिए वाराणसी की एक ब्रांच को जिम्मेदारी दी गई है, जो पीपीपी मॉडल पर इसे संचालित करेगी। बिल्डिंग तैयार है, केवल मशीन आना बाकी है।