राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत बच्चों की 38 बीमारियों के इलाज के लिए प्रदेश सरकार ने बजट दिया है। जिसके माध्यम से 6 से 19 वर्ष आयु के बच्चों की बीमारियों उपचार दिलाया जाएगा। यह पैसा स्वास्थ्य विभाग को नहीं, मेरठ मेडिकल के खाते में रखा गया है। इस बार आरबीएसके कर्मचारियों को पीड़ित बच्चे का आधार नंबर भी उसके कार्ड के साथ अटैच करना होगा। ताकि रैडम जांच में इसे ट्रैस किया जा सके।
टेंडर की रस्साकसीं में छह माह बाद चालू हुए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में 38 बीमारियों का फार्मेट भेजा गया है। इसमें मोबाइल हेल्थ वैन के जरिए स्वास्थ्य कर्मचारी प्राथमिक विद्यालयों, गांवों में जाकर बच्चों की जांच करेगी। इसमें से पीड़ित बच्चों का उपचार जिला चिकित्सालय और मेरठ मेडिकल कालेज में होगा। इसके लिए बजट भी जारी किया गया है। बच्चों के आंख, नाक, कान, गला, दिल के साथ अनेक गंभीर बीमारियों की जांच कर मोबाइल हेल्थ वैन उनका डाटा बनाएगी। इसके बाद पहले जिला चिकित्सालय पर उपचार होगा, यहां से हालात बेकाबू होने पर बच्चों को एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ भेजा जाएगा।
आरबीएसके कार्यक्रम के तहत मेडिकल कालेज को 25 लाख रुपये का बजट दिया गया है। इस पैसे से मेडिकल में मुजफ्फरनगर के पीड़ित बच्चों का उपचार होगा। आरबीएसके के लिए नौ ब्लॉकों में 18 मोबाइल हेल्थ वैन लगाई गई है। खास यह है कि इस बार मोबाइल हेल्थ के कार्य पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पीड़ित बच्चे का टीम को उपचार कार्ड भरने के साथ उसका आधार कार्ड भी लिंक करना होगा। इस आधार कार्ड को लिंक करने पर ही टीम का कार्य माना जाएगा। नवंबर माह से ही मोबाइल हेल्थ वैन चालू की गई है। पिछले छह माह से वैन टेंडर के पेंच में फंसी हुई थी।
सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन का कार्यक्रम शुरू हो गया है। इसके लिए वैनों को गांवों में चलाया जा रहा है। बीमार बच्चों के उपचार की कार्यक्रम में बेहतर व्यवस्था की गई है।