विधायक निधि से लगने वाले हैंडपंपों में घालमेल सामने आया है। जल निगम के कारिंदों ने 16 हैंडपंप कागजों में ही गाड़ दिए। इतना ही नहीं श्मशान घाट और मंदिरों के हैंडपंपों में भी घपला किया गया। सीडीओ अंकित अग्रवाल की जांच में वर्ष 2016-17 में लगाए गए हैंडपंपों की जल निगम का यह कारनामा सामने आया है।
सपा सरकार में जल निगम के अधिकारी और ठेकेदारों ने जमकर घालमेल किया है। ताजा मामला हैंडपंपों में फर्जीवाड़े का है। हैंडपंप लगे नहीं और उनका भुगतान ठेकेदारों ने हासिल कर लिया। कुछ दिनों पहले यह मामला अफसरों के संज्ञान में आया था, तब पूरे मामले का सत्यापन करने के निर्देश सीडीओ अंकित अग्रवाल को दिए गए थे। सीडीओ ने 2016-17 में लगे हैंडपंप की जांच कराई तो विभाग का यह फर्जीवाड़ा सामने आया। विधायकों की निधि से जिले में करीब 1000 हैंडपंप लगाए गए। जल निगम ने पहले तो सीडीओ को वह सूची ही देने में आनाकानी की, जिन स्थानों पर हैंडपंप लगे हैं।
सूची मिलने के बाद जब सीडीओ ने अपनी टीम से स्थलीय निरीक्षण कराया तो मौके पर 16 हैंडपंप नहीं पाए गए। एक हैंडपंप पर लगभग एक लाख का खर्च आया है, ऐसे 16 लाख का घोटाला हो गया है। इतना ही नहीं जिन स्थानों से हैंडपंप गायब हैं, उनमें मंदिर और श्मशान घाट भी शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि सरवट गांव में आबिद के मकान के पास, जाहिद के मकान के पास, ब्रह्मसिंह शर्मा के यहां हैंडपंप मौजूद नहीं मिला। कूकड़ा गांव के शांतिनगर में प्रमोद सिंघल और गांधीनगर के श्यामा श्याम मंदिर हैंडपंप नहीं लगा है।
पुरकाजी के हरिनगर गांव के श्मशान घाट, राजेंद्र के बाहर, संजय के मकान के पास, विजयपाल और अनुज के मकान के पास हैंडपंप नहीं मिला। रंडावली के मुर्गी फार्म, सुवाहेड़ी के मंजूर हसन के मकान के पास, काजीखेड़ा के नौशाद के मकान के पास, फुगाना की वाल्मीकि चौपाल, पावटी के इदरीश के मकान के पास, निरधना में जमशेद प्रधान के मकान के पास कागजों में तो हैंडपंप लगा है, लेकिन मौके पर नहीं मिला। हैंडपंप के सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी विभाग के जेई और एई की होती है। मौके पर बिना हैंडपंप के इन अधिकारियों ने कैसे रिपोर्ट दे दी, यह भी बड़ा सवाल है।
गहराई में भी है घोटाला
हैंडपंप लगाने में गहराई में भी जिले में बड़ा गड़बड़ झाला है। सूत्रों की मानें तो जहां 70 फीट की गहराई स्वीकृत है, वहां 45 से 50 फीट पर हैंडपंप लगा दिए गए हैं। विभाग को इसकी जांच करानी चाहिए। इस घपले में अधिकारी और ठेकेदार शामिल हो सकते हैं।
दोबारा सत्यापन कराएंगे : रामसेठ
जलनिगम के अधिशासी अभियंता रामसेठ सिंह ने विभाग में हुए घपले पर कहा कि सीडीओ के यहां से उनके पास सूची आ गई है। वह दोबारा जांच करा रहे हैं, उन्हें नहीं लगता कि कहीं कोई घपला हुआ है। हो सकता है हैंडपंप कहीं निर्धारित जगह के आसपास लगा दिए गए हों।
हमने 2016-17 में लगाए गए सभी हैंडपंप का भौतिक सत्यापन कराया है। इनमें अधिकतम विधायक निधि से लगे हैं। जांच में प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि 16 जगह ऐसी हैं, जहां कागजों में हैंडपंप लगे दिखाए हैं, लेकिन मौके पर कुछ नहीं है। इसकी वीडियोग्राफी भी करा ली गई है। जल निगम पुन: सत्यापन करेगा। इसके बाद वह खुद मौके पर जाकर देखेंगे। इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी - अंकित अग्रवाल, सीडीओ मुजफ्फरनगर।