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‘वीतराग संत का विरक्त जीवन राष्ट्र का प्रेरक’

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मोरना। तीन सदी के युगद्रष्टा, शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज की जयंती पर भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में महान संत विभूति का भावपूर्ण स्मरण किया गया। समाधि मंदिर में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद के सानिध्य में कथा वाचकों, भागवत भक्तों और श्रद्धालुओं ने त्याग, तप, निष्काम सेवा की प्रतिमूर्ति संत का चरणाभिषेक कर पूजन किया।
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भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में राष्ट्र संत वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज की 144 वीं जयंती पर श्रद्धालुओं ने लोकोपकारी संत के आदर्शों, नैतिक मूल्यों और अमूल्य सेवाओं को याद किया। समाधि मंदिर में विशेष पूजा की गई। शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों, आचार्यों, पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण किया। परम शिष्य स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि निष्काम कर्मयोगी स्वामी कल्याणदेव का व्यक्तित्व और कृतित्व राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। प्राणीमात्र की सेवा में ही गुरुदेव त्याग, तपस्या और मोक्ष खोजते रहे। उनका विरक्त जीवन भारत की ऋषि परंपरा की विशिष्टता का प्रतीक था।
बरनाला, पंजाब से पधारे कथा व्यास चुन्नी लाल शांडिल्य ने कहा कि वीतराग संत की सादगी, सरलता और विन्रमता सदैव समाज और राष्ट्र की सेवा को प्रेरित करती है। इटारसी, मध्य प्रदेश के कथा वाचक पंडित रमेश दूबे ने कहा कि स्वामी जी का जीवन ईश्वर की अनुपम लीला थी। उन्होंने शिक्षा की ज्योति जगाकर लाखों बच्चों को सुपथ पर चलना सिखाया। उज्जैन से आये बाल कथा व्यास सुधीर नागर ने कहा कि शुकतीर्थ का जीर्णोद्वार कार्य स्वामी कल्याणदेव की महानता का स्वरूप है। वृंदावन के कथाव्यास गौर दास, सेठ लखपत, मूलचंद दूबे, भोलाराम , सुरेश नागर, शिव भगवान अग्रवाल, कथा व्यास अचल शास्त्री, पंडित सुमन शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री, राम स्नेही शास्त्री आदि ने पूजन में भाग लिया। श्रम कल्याण विभाग के अध्यक्ष सुनील भराला, डॉ वीपी निर्वाल, सूबेदार रणधीर सिंह, गजेंद्रपाल सिंह आदि ने वीतराग संत की पावन स्मृति को नमन किया। हर्षमणि, दीपक शर्मा, राजू , रविन्द्र शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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