शहर में डस्टबिन लगाए पर कूड़ा अलग करने की व्यवस्था नहीं
मुजफ्फरनगर। नगरपालिका ने लाखों रुपये की लागत से गीले और सूखे कूड़े के डस्टबिन तो लगा दिए, लेकिन इनमें डाला जाने वाला कूड़ा अलग-अलग करने के लिए पालिका के पास कोई व्यवस्था नहीं है। यदि कूड़ा अलग ले जाकर एक जगह डाल भी दिया जाता है तो भी इसका निस्तारण नहीं हो सकेगा। करीब एक साल से नगर पालिका के कूड़े के निस्तारण का काम बंद पड़ा है। ऐसे में लाखों रुपये कीमत के डस्टबिन सफेद हाथी बनकर रह गए हैं।
नगर से प्रतिदिन करीब 160 टन कूड़ा निकलता है। मोहल्लों से इन्हें ढोकर डलावघरों में डाला जाता है, जबकि यहां से बड़े वाहनों में भरकर किदवई नगर स्थित एटूजेड मैदान में ले जाया जाता है। एक साल पहले तक एटूजेड कंपनी कूड़े का निस्तारण कर खाद बनाती थी, लेकिन अब यह काम बंद है। नगर पालिका ने सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग करने की व्यवस्था करने के लिए शहर में करीब 500 डस्टबिन लगाए हैं। एक ही फ्रेम में दो डस्टबिन फिट हैं। इनमें नीले डस्टबिन में सूखा और हरे में गीला कूड़ा डाला जाना है। प्रत्येक डस्टबिन की कीमत पांच हजार रुपये है। इस तरह लगभग ढाई लाख रुपये के डस्टबिन शहर में लगाए गए हैं, लेकिन इनका कोई लाभ नहीं हो रहा। नगर पालिका ने सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग उठाने की व्यवस्था ही शुरू नहीं की है। यदि इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया जाए, तो भी पालिका के पास कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। डलावघरों से पूरा कूड़ा एक साथ ही उठाया जाता है और ले जाकर डंपिंग ग्राउंड में डाल दिया जाता है। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे पांच वाहन
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका में कूड़ा उठाने के लिए पांच वाहन खरीदे गए हैं। पालिका से 17 वाहन खरीदने के लिए टेंडर हुआ था। इनमें से 12 वाहन कुछ दिन बाद मिलेंगे। डीएम अजय शंकर पांडेय ने शहर को पांच जोन में बांटकर त्वरित कूड़ा वाहन लगाने के निर्देश दिए थे। ये वाहन शहर में मौजूद रहेंगे तथा कहीं पर यदि कूड़ा पड़ा है तो उसे तुरंत उठाकर ले जाएंगे। इनमें कुछ वाहन डबल डस्टबिन के हैं, जिसमें एक में सूखा और दूसरे में गीला कूड़ा ले जाने की व्यवस्था है, लेकिन कूड़ा निस्तारण शुरू नहीं होने के कारण इनका कोई लाभ नगर पालिका को नहीं मिलने वाला।
उखाड़ दिए गए कई डस्टबिन
नगर क्षेत्र में गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग डालने के लिए लगाए गए डस्टबिन में से कुछ तो लगते ही उखड़ गए। नुमाइश कैंप तथा मुख्य बाजार में यह डस्टबिन टूटे पड़े हैं। कुछ स्थानों पर डस्टबिन फुल रहते हैं और इनसे कूड़ा नहीं उठाया जाता। लोग डस्टबिन के बाहर कूड़ा डालते रहते हैं।
इन्होंने कहा...
नगर पालिका जल्द ही कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था करने जा रही है। डस्टबिन इसलिए लगाए गए हैं ताकि लोगों को सूख और गीला कूड़ा अलग-अलग डालने की आदत पड़ जाए।
- ओम गिरि, ईओ, नगर पालिका।