जिले की जीवनधारा काली नदी हुई मैली
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जिले की जीवनधारा कही जाने वाली काली नदी को भी शहरी नालों के जाल ने जकड़ लिया है। नगर के बाहर तक साफ-सुथरी काली नदी शहर में आते ही प्रदूषित हो जाती है। शहर से निकले नालों के काले पानी ने नदी की जलधारा को जहरीली बना दिया है। आठ बड़े नालों के माध्यम से आधे से ज्यादा शहर का सीवेज सीधे नदी में मिल रहा है।
मुजफ्फरनगर जिले के लिए काली नदी का बड़ा महत्व है। यह नदी बामनहेड़ी, शेरपुर, मिमलाना, मुजफ्फरनगर शहर, वहलना, बेगराजपुर, हुसैनपुर बोपड़ा, हबीबपुर और नावला के नजदीक से होते हुए मेरठ जिले की सीमा में प्रवेश कर जाती है। मुजफ्फरनगर शहर से सटकर बह रही इस नदी के दो रूप दिखाई देते हैं। शहर से ऊपर की ओर मिमलाना और न्याजूपुरा में नदी एकदम साफ-सुथरी है। पानी इतना साफ है कि नीचे की जमीन नजर आती है। चरथावल रोड के पास नदी के पानी में कपड़े धो रहे ईदगाह रोड निवासी जावेद ने बताया कि यहां तक पानी बिल्कुल साफ है। लोग इसमें नहाते हैं। पास में ही पुल निर्माण में लगे सलीम और अकरम बताते हैं कि दोपहर में बच्चे यहां नहाते रहते हैं, लेकिन इससे आगे शहर की तरफ जाते ही नदी के पानी की स्थिति खराब होने लगती है। न्याजूपुरा और टिल्ला के पास नदी में शहर के गंदे नाले गिरने शुरू हो जाते हैं। नगर के आठ नाले सीधे नदी में गिरते हैं। इनमें सीवेज, पॉलिथीन और शहर की गंदगी होती है। इन नालों से प्रतिदिन लाखों लीटर गंदा पानी नदी में मिल जाता है और नाम की काली नदी वास्तव में काली हो जाती है। शहर से बाहर निकलते पर तो यह किसी गंदे नाले की तरह नजर आती है।
महीनों से बंद है सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
काली नदी पर किदवईनगर में 32.5 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बना है, लेकिन यह करीब दस महीने से बंद है। शहर में श्मशान घाट समेत तीन स्थानों पर पंपिंग स्टेशन बने हैं। इनका काम नालों के पानी को पंप करके एसटीपी तक ले जाना है, लेकिन ये तीनों भी ठप पड़े हुए हैं। नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है।
नदी के किनारे बनने हैं नए एसटीपी
काली नदी के किनारे नए एसटीपी बनाए जाने हैं। नमामि गंगे में शामिल होने के बाद नदी पर 22 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी बनाया जाएगा तथा पहले से चल रहे 32.5 एमएलडी के एसटीपी की क्षमता बढ़ाकर 65 एमएलडी की जाएगी। इसके लिए दो अरब 31 करोड़ 79 लाख रुपया स्वीकृत हुआ है। इनमें नालों का पानी साफ होकर नदी में जाएगा। एसटीपी के 15 साल तक रखरखाव का जिम्मा निर्माण करने वाली कंपनी पर ही होगा।
इन्होंने कहा...
इस समय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद है। इसे शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
- ओम गिरि, ईओ, नगर पालिका।
काली नदी पर 22 एमएलडी का नया एसटीपी बनना है। पूर्व में बने एसटीपी की क्षमता बढ़ाकर 65 एमएलडी की जाएगी। इस पर जल्द ही काम शुरू हो जाएगा।
- राजीव त्यागी, अधिशासी अभियंता, जल निगम।