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मन को शांति चाहिए तो धर्म की राह पर चलो-महाराज

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मन को शांति चाहिए तो धर्म की राह पर चलो : महाराज
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मोरना। कथा व्यास देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि बहुत जन्मों के पुण्य जब जागृत होते हैं, तो जीव सतकर्म की ओर अग्रसर होता है। जीव भगवान की भागवत कथा श्रवण करने का मन बनाता है। संकल्प लेता है और देवकृपा हो, ईष्ट की कृपा हो। स्वयं हमारे पितरों की कृपा हो।
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तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित श्री शुकदेव आश्रम में विश्व शांति सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने भागवत कथा का श्रवण किया। कथा व्यास देवकी नंदन ने कहा कि हमारे पितरों की कृपा है। हमारे देवताओं की कृपा है, हमारे आराध्य, हमारे सदगुरुदेव की कृपा है। एक बुरा दृश्य हमारे जीवन को बर्बाद कर सकता है। हमारे संत महात्मा कहते हैं कि अपनी आंखों से बुरा मत देखो, वो इसलिए कहते हैं कि जो आप देखोगे वो आपके भीतर जाएगा और फिर आप वैसा करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि मोबाइल का कम इस्तेमाल करें। इसलिए क्योंकि अनजाने में ही आप उस चीज का दर्शन कर सकते हैं, जो आपको नहीं चाहिए था और फिर उसकी लत लग गई तो उसी में लगे रहेंगे। इससे मन बर्बाद हो जाएगा और जीवन भी बर्बाद हो जाएगा। आप अपनी आंखों को नियंत्रण में रखिए। आंख जो देखना चाहती हैं वो ना देखें बल्कि, जो तुम देखना चाहते हो वो आंखें देखें तो समझ लो तुमने अपनी आंख कंट्रोल में कर ली। जब व्यक्ति धर्म और गुरु से दूर जाता है, तो दुख ही पाता है। धर्म ही सुख और शांति दे सकता है। अधर्म तो अशांति ही देगा। जो व्यक्ति धर्म की राह पर नहीं चलता। वो चाहे कितना भी बड़ा हो जाए। वो सुखी नहीं हो सकता, उसे शांति नहीं मिलेगी वो अशांत ही रहेगा। अगर मन को शांति चाहिए तो धर्म की राह पर चलिए, दिखावे के लिए नहीं बल्कि कल्याण के लिए। आप धार्मिक हैं ये दिखाना किसी को नहीं है। आपकी वाणी से, आपके कर्मों से पता चलना चाहिए की आप धर्मात्मा हैं। भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान कृष्ण की बाललीला, गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग का वृत्तांत सुनाया जाएगा।
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