लेखपाल संघ के अध्यक्ष बने ओमप्रकाश
बुढ़ाना। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की शाखा बुढ़ाना के चुनाव में अध्यक्ष पद पर ओमप्रकाश व प्रवीन कुमार के बीच सीधा मुकाबला हुआ। इस मुकाबले में ऑडिटर के पद को छोड़कर ओमप्रकाश व प्रवीन गुट के सभी प्रत्याशियों को बराबर-बराबर वोट मिले। दोनों गुटों की सहमति से पर्ची एक बॉक्स में डाली गई। अबोध बच्चे द्वारा उठाई गई पर्चियों के आधार पर अध्यक्ष पद पर ओमप्रकाश ने अपना कब्जा जमाया। पांच अन्य मुख्य पदों पर ओमप्रकाश गुट के प्रत्याशी विजयी हुए।
लेखपाल संघ शाखा बुढ़ाना के चुनाव में अध्यक्ष पद पर ओमप्रकाश व प्रवीन कुमार के बीच कांटे का संघर्ष हुआ। अध्यक्ष सहित अन्य पदों पर दोनों गुटों के सभी पदों के सभी प्रत्याशियों को बराबर बराबर वोट मिले। आडिटर के पद पर दो वोट अधिक मिलने के कारण अजेंद्रपाल विजयी घोषित हुए। बुढ़ाना तहसील में कुल 38 लेखपालों की नियुक्ति है। सभी लेखपालों ने इस चुनाव में भाग लिया। ऑडिटर के पद को छोड़कर अन्य सभी पदों पर दोनों गुटों के सभी प्रत्याशियों को 19-19 वोट मिले। इसके बाद सहमति से नाम व पद की पर्चियां बनवाकर उनकी गोलियां बनाई गई। सभी गोलियों को एक बॉक्स में डलवाया गया। अबोध बालक से पर्चियां उठवाई गई। इस प्रक्रिया में ओमप्रकाश ने अध्यक्ष के पद पर अपना कब्जा जमाया। दूसरे प्रवीन गुट के प्रताप सिंह ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर अपना कब्जा जमाया। कनिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर कुमारी रविता, सचिव पद पर ललित मोहन शर्मा, सहसचिव पद पर बिजेन्द्र कुमार तथा कोषाध्यक्ष पद पर अशोक शास्त्री चुने गए। सदर तहसील के लेखपाल संघ के अध्यक्ष संजीव मलिक ने चुनाव अधिकारी पद से सभी पदों की घोषणा की। इस चुनाव में जानसठ तहसील के अध्यक्ष मोतीराम, पर्यवेक्षक धर्मेंद्र शर्मा तथा ओमप्रकाश गुट के योगेंद्र महले सहित सभी लेखपाल मौजूद रहे।
ओमप्रकाश दूसरी बार बनें बुढ़ाना के अध्यक्ष
बुढ़ाना। लेखपाल संघ के चुनाव में ओमप्रकाश गुट ने प्रवीन कुमार गुट के प्रत्याशियों को हराकर अध्यक्ष सहित अन्य मुख्य पदों पर अपना कब्जा जमाया। ओमप्रकाश दूसरी बार लेखपाल संघ की शाखा बुढ़ाना के अध्यक्ष चुने गए हैं। वर्ष 2018 में हुए चुनाव में भी ओमप्रकाश ने अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाया था। इस चुनाव में दूसरे पक्ष के लोग उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर चुनाव को निरस्त घोषित करवा लिया था। इस बार फिर उनकी किस्मत ने साथ दिया। बराबर-बराबर वोट मिलने के बाद भी पर्ची के आधार पर वे चुनाव जीत गए।