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पर्चियों के अभाव में खेतों में सूख रहा छिला गन्ना

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मुजफ्फरनगर। खेतों में खड़े गन्ने का एक सप्ताह में सर्वे कराने का गन्ना आयुक्त का आदेश बेमानी साबित हो रहा है। मिलों की पर्चियां नहीं मिलने से किसानों का खेतों में छिला पड़ा गन्ना सूखने लगा है। सर्वे करने वाले कई कामदारों ने तो यहां तक बताया कि उन्हें सर्वे के आदेश ही नहीं मिले हैं। इससे जिले में जल्द ही गन्ना किसानों का आक्रोश फूटकर सड़क पर भी आ सकता है।
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जिले में इस बार गन्ने का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। गन्ने का सट्टा पुराने आधार पर होने के कारण पर्चियां भी उसी हिसाब से जारी हुई। ऐसे में खेतों में बढ़ा गन्ना किसानों के पास रह गया है। उत्पादन बढ़ने और गन्ना किसानों की समस्या को देखते हुए प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने खेतों में बचे गन्ने का पुन: सर्वे कराने के आदेश गन्ना विभाग को दिए थे। पांच मार्च को आदेश करने के बाद सर्वे के लिए दस दिन का समय दिया गया था। अब दस दिन में सर्वे पूरा नहीं होने और पर्ची जारी नहीं होने से किसानों को पसीने आने लगे हैं। जिले के कुछ गांवों के कामदार से बात हुई तो उन्होंने बताया कि हमें तो सर्वे के आदेश ही नहीं मिले हैं। ऐसे हालात में किसान प्रतिदिन गन्ना समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसान को फिलहाल कोई रास्ता नहीं मिल रहा। भैंसाना के किसान वैभव त्यागी का कहना है कि उसका गन्ना खेत में पड़ा सूख रहा है। पर्ची के लिए लगातार चक्कर काट रहा है, लेकिन विभाग में कोई सुनने वाला नहीं है। जसोई के विजयपाल सैनी का कहना है कि वह लोग भी पर्ची का इंतजार कर रहे हैं। बरुकी के जगपाल सिंह गुर्जर कहते हैं कि गांव के किसान पर्ची नहीं आने से ज्यादा परेशान हैं। दूधाहेड़ी के राजीव राठी का कहना है कि इस बार गन्ने का उत्पादन 20 प्रतिशत के लगभग बढ़ा है। ऐसे में उनका बढ़ा हुआ गन्ना खेत में ही खड़ा हुआ है। बिना पर्ची के उसे मिलों में कैसे डाला जाए।
आंदोलन करना मजबूरी होगी
मुजफ्फरनगर। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत का कहना है कि पर्ची को लेकर जिस तरह किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है, ऐसे में आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। प्रशासन को निद्रा से जागकर इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उधर, डीएम राजीव शर्मा का कहना है कि पर्ची नहीं मिलने की किसानों की समस्या गंभीर है। इस संबंध में वह स्वयं गन्ना विभाग के अधिकारियों से बात कर जल्द ही समस्या का निदान कराएंगे।
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