शिवपुरी में आर्यसमाज भवन का लोकार्पण
खतौली। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश महाराज ने कहा कि दयानंद सरस्वती ने शोषित और वंचित समाज के उत्थान के लिए कार्य किए। देवदासी और सतीप्रथा के खिलाफ संघर्ष कर महिलाओं को सम्मान दिलाया। समाज सुधार के लिए वैदिक संस्कृति का प्रचार करें।
शिवपुरी स्थित आर्य समाज मंदिर में नए भवन का लोकार्पण करने आए स्वामी आर्यवेश ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने कुप्रथाओं के खिलाफ वेदों की ज्योति जगाई। धर्म की आड़ में पाखंड और अंधविश्वास पर प्रहार किया। सत्यार्थ प्रकाश और संस्कार विधि उनकी अमूल्य कृति है। महिलाओं को वेदादि अध्ययन और सम्मान का जीवन दिलाने में महर्षि की अहम भूमिका है। समाज के निर्माण के लिए वैदिक संस्कृति को घर-घर पहुंचाना होगा। अंतरराष्ट्रीय पतंजलि योग विद्यापीठ के संस्थापक स्वामी कर्मवीर महाराज ने कहा कि आर्य समाज का आधार वेद है और वेद ईश्वरीय वाणी है। धर्म आत्मा की आवाज है। धर्म का कोई चिह्न नहीं होता, अपितु धर्म का लक्षण होता है। मन की पवित्रता के लिए साधना करें। महर्षि दयानंद के कार्य अद्वितीय थे। उनके सिद्धांतों और आदर्शों को अपनाकर ही समाज में ज्ञान और विज्ञान स्थापित हो सकता है। सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने के लिए सदैव तत्पर रहें। कार्यक्रम में ठाकुर विक्रम सिंह, डॉ नरेंद्र वेदालंकार, मोहित शास्त्री, सुकीर्ति और हरीशचंद ने अपने विचार रखे। संचालन सत्येंद्र आर्य ने किया। कार्यक्रम में पवन कौशिक, अजेश गुप्ता, जगदीश सिंह, सुशील आर्य, रणसिंह आर्य, नरेंद्र सिंह गहलौत, सुनील आर्य, भगवान सिंह, सुनील वर्मा आदि उपस्थित रहे।