मुजफ्फरनगर। सीआरपीएफ कमांडेंट और एक दरोगा की हत्या के मुजरिम शाहपुर के गोयला गांव के राहुल को अब ताउम्र बिहार की जेल में जिंदगी गुजारनी पड़ेगी। आठ साल पहले बिहार के सासाराम में हुई घटना से बाद से ही जवान सलाखों के पीछे बंद है। वारदात क्यों हुई, इससे परिजन भी आज तक अनजान हैं। उम्रकैद की सजा के बाद से गोयला गांव में मायूसी छायी है।
शाहपुर थाना क्षेत्र के गोयला गांव के राहुल कुमार ने सीआरपीएफ में भर्ती होकर अपने सपने को पूरा किया था। घर का बड़ा बेटा होने की वजह से उससे परिवार की उम्मीदें भी जुड़ी थीं। राहुल ने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि एक घटना उसकी जिंदगी में भूचाल ला देगी। बिहार में वर्ष 2010 में विधानसभा चुनाव की तैयारी थी। चुनाव में ड्यूटी के लिए राहुल आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम से सीआरपीएफ की टुकड़ी के साथ बिहार के सासाराम जिले में पहुंचा था। शिवसागर थाने के रायपुरचोर उच्च प्राथमिक विद्यालय के एससी-एसटी छात्रावास में टुकड़ी को ठहराया गया था। नौ अक्टूबर 2010 को राहुल संतरी की ड्यूटी पर तैनात था। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक अचानक गुस्से में राहुल ने एके 47 से फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें सीआरपीएफ कमांडेंट रोहित राज दीवान और दरोगा आरएन पांडेय की मौत हो गई। हवलदार अनिल कुमार सिंह जख्मी हुआ था। सीआरपीएफ के निरीक्षक रामलाल की ओर से शिवसागर थाने में राहुल के खिलाफ दोहरे हत्याकांड का मुकदमा दर्ज कराया गया था। घटना के बाद से ही राहुल सासाराम की जेल में बंद था। कई बार अपील के बावजूद उसे जमानत नहीं मिल पाई। केस की मजबूती लिखापढ़ी उसकी सजा का आधार बनी, जिसमें 17 गवाहों ने बयान दिए। यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट सेकेंड में चल रहा था।
अपर लोक अभियोजक विनोद कुमार सिंह के अनुसार सीआरपीएफ कमांडेंट दीवान और दरोगा पांडेय की हत्या में राहुल को धारा 302 और 324 का दोषी माना गया। न्यायाधीश रविंद्र मणि त्रिपाठी ने दोषी राहुल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उसे ताउम्र जेल में बितानी होगी। जैसे ही राहुल को उम्रकैद की सजा की खबर उसके गांव गोयला पहुंची, परिवार और संबंधियों में मायूसी छा गई। घटना की वजह क्या थी, परिजन इससे आज भी अनभिज्ञ हैं। पुलिस की विवेचना में बताया गया था कि सीआरपीएफ कमांडेंट से छुट्टी मांगने को लेकर उसकी गरमागरमी हुई थी। उसके लिए उसे डांट-फटकार भी दी गई थी। जिन सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत के बाद वह सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था, वह सब अधूरे ही रह गए। घर का बड़ा बेटा होने के नाते उस पर परिवार की उम्मीदें टिकी थीं। घटना के बाद राहुल के एक रिश्तेदार ही कोर्ट में उसकी पैरवी कर रहे थे।
सजा से गोयला में मायूसी
मुजफ्फरनगर। उम्रकैद की सजा पाए राहुल के पिता वीरसिंह लघु किसान हैं। सीआरपीएफ में भर्ती होने के बाद घर में खुशी का माहौल था। उसकी शादी के लिए रिश्ते भी आने लगे थे, लेकिन बिहार की घटना ने उसकी जिंदगी तबाह कर दी। वारदात के बाद वह कभी गांव का रुख नहीं कर पाया। आठ साल तक केस लडऩे की वजह से परिवार और रिश्तेदारों को भी मुसीबतों से गुजरना पड़ा। सजा की जानकारी मिलने के बाद से गोयला में मायूसी छाई है।