व्यापारियों ने जीएसटी नियमों में संशोधन कर राहत देने की मांग करते हुए बुधवार को डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्तमंत्री अरुण जेटली और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन एडीएम वित्त सियाराम मौर्य को सौंपा।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेश चौहान और महामंत्री राजेंद्र काटी के नेतृत्व में व्यापारी कलक्ट्रेट पहुंचे और जीएसटी में व्याप्त समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार एक अप्रैल से ई-वे बिल व्यवस्था को प्रभावी करेगी, तब तक यदि कोई व्यापारी केन्द्रीय ई-वे बिल लोड कर लेता है और किसी भी राज्य में कोई सामान भेजता है, खासतौर से उत्तर प्रदेश में तो उससे दोगुने जुर्माने की वसूली नहीं की जाए। केंद्रीय ई-वे बिल को पूरी मान्यता दी जाए। राजेंद्र काटी ने सरकारों से मांग करते हुए कहा कि जीएसटी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाए, सर्वे छापे कतई बंद किए जाएं, विशेष तौर से उत्तर प्रदेश में ये कार्रवाई न हो। डीजल और पेट्रोल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए। उत्तर प्रदेश से मंडी शुल्क को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले काफी वर्षों से व्यापारी तीन सितंबर को व्यापारी दिवस भामाशाह दिवस मनाते आ रहे हैं। इसको राज्य में सरकारी तौर पर व्यापारी दिवस घोषित किया जाए। प्रदर्शनकारियों में राजेंद्र सिंघल, प्रमोद त्यागी, जयपाल शर्मा, सुरेश बिंदल, अनिल जैन, अरविंद, विजय पाल, सोनू भटनागर, अशोक गर्ग, विनय शंकर, सुरेंद्र पाल, तिरसपाल, राजेश बत्रा, नरेश बंसल, नरेश अरोरा, राकेश ढींगरा, जनार्दन विश्वकर्मा, अकमल, मुस्तफा, अशोक नागपाल, धारा सिंह पाल, नीरज बंसल, विपिन मित्तल, विपिन छपार, गौरव जैन, अंशुमान अग्रवाल, बंटी अग्रवाल आदि व्यापारी मौजूद रहे।